क्यों सीखें संस्कृत ? (भाग – ८)


हिन्दू धर्मके प्राचीन धार्मिक ग्रन्थ संस्कृतमें हैं । जबतक आप संस्कृत नहीं सीखते हैं, तबतक आप हिन्दू दर्शनकी इस बहुमूल्य धरोहरसे अनभिज्ञ रहेंगे ! भाषान्तरित ग्रन्थोंका वाचन करनेसे उस व्यक्ति विशेषके विचारसे हम प्रभावित हो सकते हैं, जो अयोग्य हो सकते हैं और हो भी वही रहा है । आजकल अधिकांश भाषान्तरित ग्रन्थ पठनके योग्य नहीं हैं, कुछ तथाकथित अध्यात्मविदको सत्यको अर्धसत्यके रूपमें बताकर समाजको दिशाभ्रमित भी कर चुके हैं । यह भी आवश्यक नहीं कि उस व्यक्तिने सही भाषान्तरण किया हो; इसलिए स्वयं संस्कृत सीखें और वैदिक दर्शनकी ज्ञान गंगामें डुबकी लगाकर अपने मन एवं बुद्धिको पावन करें !

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कैसे सीखें संस्कृत ?
विद्यालयीन पाठ्यक्रमोंमें बारहवीं तकके पुस्तकोंका प्रथम अभ्यास करें, तत्पश्चात ‘लघुसिद्धान्तकौमुदी’ जैसे ग्रन्थोंका अभ्यास आरम्भ करें ! किसी भी भाषाका प्राण उसका व्याकरण होता है और संस्कृतका व्याकरण एक दर्शन है, आप जितना सूक्ष्मतासे इसका अभ्यास करेंगे, यह उतना ही आपको आनन्द प्रदान करेगा । मात्र प्रतिदिन एक घण्टा इसके अभ्यास हेतु निकालनेकी आवश्यकता है । साथ ही ‘यूट्यूब’की भी सहायता ले सकते हैं; किन्तु सदैव संस्कृत सीखने हेतु प्रथम व्याकरणसे उसका अभ्यास आरम्भ करें !



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