घरसे भाग ‘लिव-इन’ सम्बन्धमें रहना अनैतिक और अस्वीकार्य : पंजाब-हरियाणा न्यायालय


१९ मई, २०२१
  १२ मई २०२१ को एक भारतीय न्यायालयने ‘लिव-इन रिलेशनशिप’में रह रहे दो लोगोंको सुरक्षा देनेकी मांगको अस्वीकृत कर दिया । पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालयने अपने एक आदेशमें स्पष्ट कहा कि ‘लिव-इन’ सम्बन्ध नैतिक और सामाजिक रूपसे स्वीकार्य नहीं हैं ।
  न्यायालयने कहा कि यदि इस प्रकारकी सुरक्षा दी जाती है, तो समाजका पूरा सामाजिक ताना-बाना बिगड जाएगा । न्यायमूर्ति एचएस मदानने पंजाबके तरनतारन जनपदके एक भागे हुए युगलद्वारा अपने जीवन और स्वतन्त्रताकी सुरक्षाकी मांग करनेवाली याचिकाको अस्वीकृत करते हुए यह निर्णय सुनाया ।
  यह युगल ‘लिव-इन रिलेशनशिप’में रह रहा था । याचिकाकर्ता गुलजा कुमारी और गुरविंदर सिंहने अपनी याचिकामें कहा था कि वर्तमानमें वे एक साथ रह रहे हैं और शीघ्र ही विवाह करनेका निर्णय लेंगे । इन दोनोंने युवतीके माता-पितासे अपने प्राणोंको होनेवाले संकटको लेकर चिन्ता व्यक्त की थी ।
     न्यायाधीशका यह निर्णय सर्वथा उचित है । इसका स्वागत किया जाना चाहिए; परन्तु ऐसे ही प्रकरणको अन्य न्यायालय व्यक्तिगत स्वतन्त्रता बताकर हस्तक्षेप करनेसे मना कर चुके हैं और सुरक्षा भी उपलब्ध करानेका आदेश दे चुके हैं; अतः विधानकी विसंगति दूर करनेके लिए नूतन विधान बनाया जाना चाहिए, जिसमें बिना विवाहके साथ रहनेकी अनैतिक गतिविधि एक आपराधिक कृत्य हो । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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