मार्च १२, २०१९
देहलीमें हुए कांग्रेस बूथ कार्यक्रममें पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी कार्यक्रममें पुलवामा आक्रमण और मसूद अजहरके मुद्देपर भाजपापर प्रहार कर रहे थे । इसी मध्य उनके मुखसे निकला, ‘मसूद अजहर जी !’
राहुलने कहा, “पुलवामामें बसमें किसने बम विस्फोट किया ?, जैश ए मोहम्मद, मसूद अजहर । ५६ इंच छातीवाले, गत शासनमें विमानमें मसूद अजहरजीके साथ बैठकर, जो आज ‘एनएसए’ हैं, अजीत डोभाल मसूद अजहरको कंधारमें हवाले करके आ गए थे ।
भाजपाने लिखा, “देशके ४४ वीर सैनिकोंके प्राणोंके लिए उत्तरदायी आतंकी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’के मुखियाके लिए राहुल गांधीके मनमें इतना सम्मान !
इस वीडियो देखकर ऐसा लगता है कि राहुल यकायक ही मसूदको ‘जी’ बोल गए । कार्यकर्ताओंको अपने संबोधनके मध्य प्रथम बार उन्होंने मसूद अजहर कहा, दूसरी बार ‘मसूद अजहर जी’ और तीसरी बार मसूद अजहर कहा । मसूदको ‘जी’ बोलना उनकी किरकिरी करवा सकता है; क्योंकि भाजपाने इसे मुद्दा बनानेमें पलभरकी देरी नहीं की ।
वर्ष २०१३ में दिग्विजय सिंहने आतंकी सगंठन ‘जमात-उद-दावा’के मुखिया हाफिज सईदको ‘साहब’ कहा था । उस समय उनके इस वक्तव्यकी आलोचना हुई थी । एक वर्ष पूर्व भाजपा नेता रविशंकर प्रसादने भी हाफिज सईदको ‘जी’ बोला था । आठ वर्ष पूर्व दिग्विजय सिंहने अमेरिकाको विस्फोटित करनेवाले आतंकी ओसामा बिल लादेनको ‘जी’ बोला था !
“निस्सन्देह कोई भी नेता मनानुसार ‘जी’ नहीं कहता होगा, उनके मुखसे ही निकलता होगा, अन्यथा वोट और कुर्सीके लालची नेता इतने मूढ तो नहीं हो सकते हैं कि आत्महत्या ही कर ले; परन्तु एक बात स्पष्ट है कि ऐसे नेता नेतृत्वके गुणोंसे सम्पन्न नहीं होते हैं और न ही देशओ चलाने योग्य ! केवल जितना लिखकर दिया जाए, वहीं पढते हैं । प्रथम तो वास्तविक नेताको बोलनेकी आवश्यकता ही नहीं होती है; क्योंकि उसके सत्कर्म ही चीख-चीखकर उसके कृत्योंको बताते हैं और यदि वह बोले भी तो उसका एक-एक वचन अपने आपमें ब्रह्मवाक्य समान ही होता है; परन्तु दुखद है कि ऐसा नेता स्वतन्त्रता पश्चात राजनीतिमें उच्च पदपर इस भूमिने देखा ही नहीं अथवा यूं कहें कि आधुनिकताके रंगमें रंगे राजनीतिज्ञ माता-पितामें वो महान आत्माएं उतारनेकी क्षमता ही नहीं रही; क्योंकि अन्योंको तो आजके राजनेता आगे आने ही नहीं देते हैं । इससे स्पष्ट है कि आज राजनीतिके शुद्धिकरणकी कितनी आवश्यकता है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
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