अवसरवादी कमल हासनका हिन्दूविरोधी वक्तव्य, स्वतन्त्र भारतका प्रथम आतंकी हिन्दू ही था !!


मई १३, २०१९



लोकसभा चुनावके मध्य हिन्दू, हिन्दुत्व और हिन्दू आतंकवादके प्रकरणपर चल रही बडी बहसके मध्य एक और वक्तव्य आया है । दक्षिणभारतके अभिनेता और कुछ दिवस पूर्व ही नेता बने कमल हासनने अपनी एक सभामें कहा कि स्वतन्त्र भारतका पहला आतंकवादी हिन्दू ही था और वो था नाथूराम गोडसे !!

तमिलनाडुके ‘ARIVAKURICHI’में एक जनसभाको सम्बोधित करते हुए कमल हासनने ये बात कहीं । उन्होंने कहा, “यहांपर मुसलमान उपस्थित हैं, मैं इसलिए ऐसा नहीं बोल रहा हूं; परन्तु स्वतन्त्र भारतमें प्रथम आतंकवादी हिन्दू ही था, जो कि नाथूराम गोडसे था ! इसका आरम्भ तब हुआ था, जब नाथूराम गोडसेने महात्मा गांधीकी हत्या की थी । जिस समय कमल हासनने ये वक्तव्य दिया, उस समय वे आनेवाले उपचुनावके लिए प्रचार कर रहे थे ।

कमल हासनके इस वक्तव्यपर भाजपा भडक गई है । भाजपा नेता अश्वनी उपाध्यायने चुनाव आयोगसे कमल हासनकी परिवाद (शिकायत) की है । उन्होंने दो समुदायके मध्य उन्माद व्याप्त करनेको लेकर उनपर प्राथमिकी (एफआइआर) प्रविष्ट करानेकी भी मांग की है ।

उल्लेखनीय है कि इस चुनावमें हिंदू आतंकवादका विषय अपने चरमपर है । जब भारतीय जनता पार्टीने मध्य प्रदेशकी भोपाल लोकसभा सीटसे मालेगांव आतंकी विस्फोटकी आरोपी साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुरको टिकट दिया, तो विपक्षी पार्टियोंने इसपर प्रश्न खडे कर दिए ।

विपक्षके प्रश्न करनेके पश्चात बीजेपी इस विषयपर आक्रमक ही रही । प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह सहित पूरी बीजेपीने इस प्रकरणपर कांग्रेसको घेरा और उनपर हिन्दुओंको अपमानित करनेका आरोप लगाया ।

 

“कमल हासन सम्भवतः भूल गए हैं तो स्मरण करवा देते हैं कि उनकी चलचित्र विश्वरूपममें जब उन्होंने आतंकवादका विषय उठाया था और जालीदार टोपी पहने हुए लोगोंको आतंकीके रूपमें प्रदर्शित किया था तो देशमें मुसलमानोंद्वारा उनका चहुंओर विरोध हुआ था तो इन्होंने उद्विग्न होकर देश छोडनेकी चेतावनी दी थी; क्योंकि उनकी चलचित्रका प्रकाशन रोके जानेके कारण उन्हें भारतमें धर्मनिरपेक्षता नहीं दिख रही थी और आज वही कमल हसन उन्हीं मुसलमानोंके तुष्टिकरणके लिए हिन्दू आतंकवाद शब्दका प्रयोग कर रहे हैं, जिनके कारण वे देश छोड देना चाहते थे । ये सब प्रकरण कमल हासनकी अवसरवादिताको दिखाता है । ये लोग केवल पैसेके पीछे ही भागते हैं और मूढ हिन्दू इन्हें अपना आदर्श मानते हैं । जिस व्यक्तिको देशने सब कुछ दिया वो एक चलचित्रके न प्रकाशित होनेपर देश छोडनेको सज्ज था, ऐसे स्वार्थी लोगोंकी वाणीपर विश्वास किया जा सकता है क्या ? सभी हिन्दू ऐसे निधर्मियोंका बहिष्कार करें ।” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : आजतक



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