राजा प्रजापालक होता है, वह अपनी प्रजामें एक्य, समता और आपसी सौहार्दका गुण पल्लवित करता है; किन्तु कलियुगी लोकतान्त्रिक व्यवस्थाके तमोगुणी राज्यकर्ता अपनी प्रजामें फूट, वैमनस्य एवं जात-पातके भेदभावके अवगुणको प्रसारित करता है; इसलिए ऐसे निधर्मी लोकतंत्रका अन्त होना चाहिए !
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