लोकतान्त्रिक व्यवस्थाके राज्यकर्ताओं द्वारा प्रजामें फूट, वैमनस्य एवं जात-पातका भेदभाव हो रहा प्रसारित!


राजा प्रजापालक होता है, वह अपनी प्रजामें एक्य, समता और आपसी सौहार्दका गुण पल्लवित करता है; किन्तु कलियुगी लोकतान्त्रिक व्यवस्थाके तमोगुणी राज्यकर्ता अपनी प्रजामें फूट, वैमनस्य एवं जात-पातके भेदभावके अवगुणको प्रसारित करता है; इसलिए ऐसे निधर्मी लोकतंत्रका अन्त होना चाहिए !



Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

सम्बन्धित लेख


© 2017. Vedic Upasna. All rights reserved. Origin IT Solution