मार्च १, २०१९
पतिकी मृत्युके पश्चात उदयपुरमें आश्रय देनेवाले युवकके हाथों नष्ट हुई महिलाने सडकपर भीख मांगते हुए प्राण त्याग दिए । कभी महंगे वाहनोंमें घूमते हुए राजसी जीवन जीनेवाली इस महिलाको गुरुवार, २८ फरवरीको निराश्रित गृहमें पल रही उसकी नौ वर्षीय पुत्रीने मुखाग्नि दी । वह श्मशानमें शवको देखते ही फफक पडी । पालनपुर गुजरातसे मृतकाकी बहन व भाणेज भी यहां पहुंचे । उन्होंने महिलाकी दु:ख भरी कहानी सुनाई तो सभीके नेत्र भर आए ।
मंडार आबूरोड (सिरोही) निवासी गुलाब कंवर (बादमें आसमा खां) तीन दिन पूर्व सुखाडिया सर्कलपर चोटिलावस्थामें मिली थी । चिकित्सालय लानेपर उसने प्राण त्याग दिए ।
मृतकाकी बडी बहन गीता बेन व सूरतसे भाणेज कृष्णपाल सिंह उदयपुर पहुंचे । गीता बेनने ‘सीडब्ल्यूसी’को बताया कि मंडार निवासी गुलाब कंवरका विवाह २५ वर्ष पूर्व आबूरोड में एक सम्पन्न परिवारमें हुआ था । उसके पास कोटि रूपयोंकी सम्पत्ति थी । विवाहके पश्चात उसके दो पुत्रियां हुई । बडी पुत्री २१ एवं छोटी ९ वर्षकी है । ७ वर्ष पूर्व पतिकी मृत्युके पश्चात वह बडी पुत्रीको पढानेके लिए जयपुर ले गई थी । यह परिवार उदयपुर घूमने आया था, जहांपर शाकिर नामके एक युवकके साथ जान-पहचान हो गई । उसने सम्पत्ति हडपनेके लिए गुलाब कंवरसे निकाह कर लिया और बादमें उसे नशेका आदी बना दिया । इस मध्य उसने बडी पुत्रीका उदयपुरमें ही किसी मुस्लिम युवकसे निकाह करवा दिया । कुछ समयके पश्चात जब गुलाब कंवर रूग्ण हुई तो शाकिरने उसकी सारी सम्पत्ति हडपते हुए उसे पुत्री सहित घरसे निकाल लिया । नशेकी आदी हो चुकी गुलाब कंवर चिकित्सालय परिसरमें भीख मांगकर खाने लगी । बादमें ज्ञात होनेपर ‘सीडब्ल्यूसी’ने बच्चीको मीरा निराश्रित गृहमें रखवाते हुए उसे विद्यालयमें भर्ती करवाया तथा मांको चिकित्सालयमें प्रविष्ट करवाया; परन्तुक्षवह सडकोंपर घूमकर भीख मांगते हुए अपना जीवन यापन करने लगी ।
बालिकाके सर्वोत्तम हितमें एवं उसके भविष्यको देखते हुए वैधानिक रूपसे जो होगा उसके लिए बाल कल्याण समिति जिलाधिकारी एवं अध्यक्ष बाल संरक्षण इकाईको अनुशंसा करेगी ।
“अज्ञानता व धर्महीनताके कारण एक धर्मान्धसे प्रेमकर अपना व अपनी पुत्रियोंका जीवन नष्ट करनेवाली गुलाबको सम्भवतः अब समझमें आनेका समय भी नहीं है; क्योंकि ईश्वरने जिस सुन्दर जीवन जीनेको उसे दिया था, उसने अपने कृत्योंसे स्वयं ही उसे ठोकर मारी । गुलाबके पास अब निस्सन्देह समझनेका समय नहीं है; परन्तु हिन्दू युवतियों आपके पास समझने व सम्भलनेका समय अवश्य है । चलचित्रोंमें भिन्न-भिन्न ‘खान’को देखकर युवतियां सोचती है कि मेरेवाला ‘खान’ समाचारमें पढे जानेवाले ‘खान’ जो लवजिहाद करता है, उससे भिन्न होगा; परन्तु शीघ्र ही उसका भ्रम टूटता है और वह अपना सब कुछ नष्ट कर चुकी होती है । यदि गुलाबको भी अपने माता-पितासे स्वधर्मके व साधनाके संस्कार मिले होते तो उसका जीवन यूं नष्ट न होता; अतः माता-पिता अपने बालकोंको धर्माभिमान बनाए व उनसे साधना करवाएं व स्वयं करें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : पत्रिका
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