पूर्व महिला प्राध्यापकको यौन शोषणके प्रकरणमें १३ वर्षोंसे है न्यायकी प्रतीक्षा
२२ जून, २०२१
तमिलनाडुकी राजधानी चेन्नईमें स्थित लोयोला महाविद्यालयकी एक पूर्व महिला प्राध्यापकने अपने साथ हुए यौन शोषण प्रकरणके आरोपीके विरुद्ध अपने १३ वर्षीय पीडादायक अनुभवको साझा किया है । समाचारके अनुसार, महाविद्यालयकी पूर्व प्राध्यापक जोसेफिन जयाशांतिने बताया है कि उनके तमिल विभागके अध्यक्ष प्राध्यापक डॉ एस एंटोनी राजराजनने वर्ष २००८ से निरन्तर किस प्रकार उनका उत्पीडन किया था । वह जब भी अवकाश मांगने हेतु उनके कक्षमें जाती थी तो जोसिफनद्वारा दिए हुए प्रार्थनापत्रको वह उनके मुंहपर फेंक देता था तथा उनके विरुद्ध आपत्तिजनक शब्दोंका प्रयोग करता था । वह सदैव उन्हें सभीके समक्ष अपमानित करता; परन्तु वह अचम्भित तब हो गई जब राजराजनने उन्हें एक विश्रामालयमें अपने साथ रहने हेतु आमन्त्रण दिया तथा उनके विरुद्ध अति अपमानजनक शब्दोंका प्रयोग करते हुए उन्हें अपनी कामनाओंकी पूर्ति हेतु पुनः-पुनः बाध्य किया । वर्ष २०१२ में महाविद्यालयकी ‘एंटी सेक्सुअल हरासमेंट कमेटी’के समक्ष जोसेफिनने अपना परिवाद प्रविष्ट किया; परन्तु उनपर दबाव बनाकर उसे लौटा लेने हेतु कहा गया । उनके आरोपोंकी जांचके लिए कोई पृथक समिति भी नहीं बनाई गई । वहीं जब मद्रास उच्च न्यायालयने इस प्रकरणकी सुनवाई पश्चात राजराजनको पदच्युतकर जोसेफिनको क्षतिपूर्ति राशि देनेका आदेश दिया । तब भी महाविद्यालयने अभीतक ऐसा कोई पग इस दिशामें नहीं उठाया है । अब महिला आयोगने इस प्रकरणके अन्तर्गत मद्रास उच्च न्यायालयकी आज्ञा पालन न होनेपर कार्यवाही करने हेतु न्यायालयसे आग्रह किया है ।
यह आजके भारतका कटु सत्य है । यहां शिक्षाके मन्दिरोंमें भी ऐसे जघन्य अपराध होते हैं, वहां क्या शिक्षा दी जाती होगी ? जहां धर्मके स्थानपर अधर्मका साम्राज्य होगा, वहां अराजकता इसी प्रकार प्रसारित होती है । अब हिन्दूराष्ट्रकी स्थापनाके पश्चात ही इन सभी गतिविधियोंपर अंकुश लगेगा और शिक्षाके मन्दिरोंमें यह सब कुकृत्य नहीं होंगे । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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