अप्रैल ४, २०१९
उत्तर प्रदेशमें शासकीय धनके प्रयोगमें भ्रष्टाचार उजागर हुआ है । ९७ सहस्र कोटिकी धनराशि कहां-कहां और कैसे व्यय हुई ?, इसका कोई लेखा-जोखा ही नहीं है । ‘कैग’के ब्यौरेमें उजागर हुआ कि अखिलेश शासनमें शासकीय धनकी प्रखर लूट हुई है ! शासकीय योजनाओंके नामपर भ्रष्टाचारकर ९७ सहस्र कोटि रुपएके शासकीय धनका बंदरबांट हुआ । सबसे अधिक भ्रष्टाचार समाज कल्याण, शिक्षा और पंचायतीराज विभागमें हुआ है । केवल इन तीन विभागोंमें २५ से २६ सहस्र कोटि रुपये कहां व्यय हुए ?, विभागीय अधिकारियोंने कोई लेखा-जोखा नहीं दिया है !
‘कैग’ने ३१ मार्च, २०१७-१८ तक उत्तरप्रदेशमें व्यय हुए बजटकी जांच की है । ‘कैग’ने कहा कि उत्तर प्रदेशमें व्यय हुए कुल धनराशीका लेखा-जोखा अखिलेश शासनके पास नहीं है । व्ययकी उपयोगिता प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं होनेसे उत्तरप्रदेशमें बडे स्तरपर धनराशिके दुरुपयोग और व्ययमें धोखाधडीकी आशंका है ।
कैगने जिस अवधिमें व्ययकी जांच की है, उस समय अखिलेश यादवका सपा शासन रहा । उत्तरप्रदेशमें २०१४ से ३१ मार्च २०१७ के मध्य हुए लगभग ढाई लाखसे अधिक कार्योंकी उपयोगिता प्रमाणपत्र उपलब्ध ही नहीं हैं । उत्तरप्रदेशमें धनराशिके उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा न करनेका प्रकरण कई बार शासनके समक्ष लाया गया; परन्तु कोई सुधार नहीं हुआ है ।
“उत्तरप्रदेशकी इस दुर्गतिका श्रेय पूर्णतया सपा और बसपाको जाता है । जिस वृक्षको तथाकथित दलित हितैषिणी सुश्री मायावतीजीने रोपा, अखिलेशजी उसीको खाद और पानी देकर गए हैं और ऐसा हो भी क्यों न ? देशका सबसे बडा समाज नागरिक यादव, जाट, ब्राह्मण आदिके नामपर लडनेमें व्यस्त है और नेता घर भरनेमें ! अभी कुछ माह पूर्व ही समाचार आए थे कि अखिलेश शासकीय भवन छोडते समय कोटि रूपयोंकी तोडफोड करके गए थे, अब ऐसे नेताओंसे क्या आशा की जा सकती है ? और यह केवल उत्तर प्रदेशकी नहीं, अधिकतर राज्योंकी यही स्थिति है । सहस्रों कोटिका भ्रष्टाचार ऐसे होता है, जैसे कुछ सौ रूपयोंका ! अनुमान करना कठिन है कि यदि ये पैसा जनतातक पहुंच जाता तो आज यह देश कहांसे कहा होता ! कुछ सहस्र कोटिके अस्त्र-शस्त्र नहीं क्रय कर पानेवाला भारत, सहस्रों कोटिसे नेताओंके घर भर रहा है !! योगी शासन इसकी जांचकर दोषियोंपर कडीसे कडी कार्यवाही करें और उचित दण्ड प्रदान करें !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : न्यूज १८
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