कमलनाथ सॉफ्ट हिन्दुत्वकी राहपर, शासकीय देवालयोंमें पुजारियोंकी भर्ती प्रक्रिया आरम्भ, वंशजोंको प्राथमिकता !


जनवरी ६, २०१९


मध्य प्रदेश शासनके अधीन आनेवाले मन्दिरोंमें पुजारियोंकी नियुक्ति होनेवाली है । राज्यके अध्यात्म विभागने पुजारियोंकी नियुक्तिकी प्रक्रिया भी आरम्भ कर दी है । इन नियुक्तियोंमें पुजारियोंके वंशजोंको प्राथमिकता दी जाएगी । अध्यात्म विभागने पुजारियोंकी नियुक्तिके लिए जो नियम बनाए हैं, उसके अनुसार वंश परंपराके साथ ही गुरु-शिष्य परम्पराको भी प्राथमिकता दी जाएगी । राज्यमें प्रथम बार शासकीय स्तरपर पुजारियोंकी नियुक्तियोंके सम्बन्धमें नियम प्रक्रिया निर्धारित की गई है ।

आधिकारिक रूपसे मंगलवार, ५ फरवरीको प्रदत्त ब्यौरेके अनुसार, शासनद्वारा पुजारियोंकी नियुक्तिके लिए अर्हताएं (योग्यताएं) निर्धारित की गई हैं । पिताके पुजारी होनेकी स्थितिमें उसी वंशके आवेदकको अन्य सभी योग्यताएं पूर्ण करनेपर प्राथमिकता दी जाएगी । पुजारी पदके लिए आठवींतक शिक्षित, न्यूनतम आयु १८ वर्ष और स्वस्थ होना आवश्यक है । पूजा विधिका प्रमाण-पत्र परीक्षा उत्तीर्ण होकर पूजा विधिका ज्ञान और शुद्ध शाकाहारी होना भी आवश्यक है ।

इसके अतिरिक्त पुजारी मद्यपान न करने वाला और आपराधिक चरित्रका नहीं होना चाहिए । अध्यात्म विभागने निर्धारित किया है कि यदि कोई मन्दिर मठकी श्रेणीमें आता है और उस मन्दिरपर किसी सम्प्रदाय विशेष अथवा अखाडा विशेषके पुजारी होनेकी परम्परा रही है तो गुरु-शिष्य परम्पराके आधारपर पुजारीकी नियुक्ति प्राथमिकतासे की जाएगी ।

उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व राज्य शासन पुजारियोंको मिलनेवाले मानदेयको तीन गुणा करनेकी घोषणा कर चुका है । राज्यके पुजारियोंको अबतक एक सहस्र रुपये मानदेय मिलता है, जो बढकर तीन सहस्र हो जाएगा ।

 

“निर्णय निःसन्देह उत्तम है; परन्तु कांग्रेसके कृत्य इतनी शीघ्र क्षमा नहीं किए जा सकते हैं । गत दिवसोंमें समाचार आया था कि कमलनाथ विद्यालयोंमें लोकसभा मतदानतक ‘गीता-सार’ नामक पाठ्यक्रम बन्थ करनेपर विचार कर रहे हैं तो किसपर विश्वास किया जाए ? और यदि मध्यप्रदेश कांग्रेस सत्यमें ही हिन्दुत्वनिष्ठ होना चाहती है तो मन्दिरोंको शासकीय नियन्त्रणसे मुक्त करें व भोजशाला जिसपर धर्मान्धोंने अधिकार किया हुआ है, वह भी मुक्त करवाएं ! कर पाएंगें ?”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

स्रोत : नभाटा



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