यदि ‘शरिया’से हिन्दू प्रदर्शनोंपर प्रतिबन्ध लगने लगे, तो मुसलमान अधिकांश स्थानोंपर बाहर नहीं निकल सकेंगे : मद्रास उच्च न्यायालय
१४ मई, २०२१
कुछ दिवस पूर्व मद्रास उच्च न्यायालयमें तमिलनाडुके पेरंबलुर जनपदके वी कलाथुरमें मुसलमान बहुल क्षेत्रके लोगोंने ‘शरिया’ विधान अनुसार याचिका प्रविष्ट करते हुए कहा कि हमारे क्षेत्रसे मन्दिरकी शोभायात्रा निकालनेपर प्रतिबन्ध लगाया जाए; क्योंकि ‘शरीयत’ अनुसार यह पाप है और इस क्षेत्रके बहुसंख्यक मुसलमान २०१२ वर्षसे ही यहां रहनेवाले हिन्दुओंके धार्मिक त्योहारों व शोभायात्राओंके निकलनेपर आपत्ति जता रहे थे; परन्तु मद्रास उच्च न्यायालयने इस विषयमें हिन्दुओंके पक्षमें निर्णय देकर धार्मिक त्योहार मनानेका उनका अधिकार सुरक्षित रखा है । न्यायाधीशोंने इसपर निर्णय सुनाते हुए कहा, “धार्मिक असहिष्णुता देशकी धर्मनिरपेक्ष सरंचना लिए हानिकारक है । यदि एक समूहके धार्मिक त्योहारों और आयोजनको दूसरे धार्मिक समूहद्वारा रोका जाएगा, तो इससे ‘दंगे’ और अराजकता हो सकती है ।”
न्यायाधीशोंने तर्क दिया कि यदि ऐसे प्रकरणोंको स्वीकार कर लिया जाता है, तो भारतका मुसलमान भारतके अधिकांश भागोंमें अपने त्योहार नहीं मना पाएगा ।
न्यायालयने जो निर्णय दिया वह स्वाभाविक है; परन्तु इस प्रकारकी मांग धर्मान्धोंद्वारा की गई, यह आश्चर्यजनक नहीं है । यह उनकी वैश्विक मानसिकता है, जो मूढ धर्मनिरपेक्ष हिन्दुओंको समझमें नहीं आती है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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