मथुराके महमदपुर ग्रामका मूलभूत नामकरण परासौली हुआ, सूरदासकी तपोस्थलीमें हर्षोल्लास 


०८ अप्रैल, २०२१
      गोवर्धन तहसीलके निकट स्थित महाकवि सूरदासकी तपस्थली महमदपुर ग्रामका मूलभूत नामकरण परासौली हो गया है । इस सम्बन्धमें सूरदास ब्रज रासस्थली विकास समिति परासौली विगत चार दशकोंसे प्रयासरत थी । अब शासनद्वारा इसे स्वीकृत कर लिया गया है ।
      राधा कृष्णकी रासस्थली और उनके अनूठे प्रेमके साक्षी इस ग्रामका शासनद्वारा इसकी अधिसूचना प्रस्तुत करनेकी सूचना मिलते ही ग्रामवासी झूम उठे । वर्तमान मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथने वर्ष २०१८ में मांग किए जानेपर कार्यवाहीके परिणामस्वरूप उक्त ग्रामका वास्तविक नामकरण सम्भव हो पाया ।
     इस ग्रामका नाम ऋषि पाराशरकी जन्मस्थलीके कारण परासौली पडा था । वहीं वल्लभाचार्यके अनुसार, भगवान कृष्ण एवं राधारानीने यहां चन्द्र सरोवरके निकट ब्रह्माजीके एक क्षण अर्थात छह मासतक रास किया था, जिससे इस स्थलीका माहात्म्य बढ गया । कलियुगमें भी महाकवि सूरदासकी कर्मस्थलीके रूपमें विख्यात होनेके पश्चात यह ग्राम साहित्य एवं संस्कृतिकी दृष्टिसे और भी महत्त्वपूर्ण हो गया है । महाकविकी सभी प्रमुख रचनाओंने यहीं आकार पाया; किन्तु मुगलकालमें इसका नाम परिवर्तितकर महमूदपुर कर दिया, जो दुर्भाग्यवश स्वतन्त्रताके सात दशकके पश्चात भी शासनद्वारा उपेक्षित ही किया जाता रहा ।
      सूरदास ब्रज रासस्थली विकास समिति व योगी आदित्यनाथ शासनको कोटिशः धन्यवाद; ऐसे अनेक कोढ, जो इस राष्ट्रपर हैं, उन्हें भी हिन्दू एक होकर शासनसे दूर करवाएं ! – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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