चण्डीपाठ करके मजारपर ‘चादरपोशी’में नन्दीग्राम महासंग्राममें ममताने खेला ‘हिन्दू-मुस्लिम कार्ड’
१० मार्च, २०२१
बंगाल विधानसभा चुनावकी सबसे मुख्य सीट नंदीग्रामसे ममता बनर्जीने हुंकार भर दी है । ममता बनर्जीने बीजेपीके प्रत्याशी शुभेंदु अधिकारीको चुनौती देते हुए कहा कि हिन्दू ‘कार्ड’ नहीं खेले । वह भी हिन्दू धर्मकी ही बेटी हैं । यद्यपि, इसके कुछ समय पश्चात ही वह शमशाबाद मजारपर भी पहुंची और ‘चादरपोशी’ भी की । इसके उपरान्त ममता बनर्जीने हरि मन्दिर और दुर्गा मन्दिरमें भी दर्शन किया । राजनीतिक जानकारोंका कहना है कि ममता बनर्जी प्रत्येक वर्गके मतदाताओंको साधनेका प्रयास कर रही हैं ।
ममता बनर्जीने भारतीय जनता पार्टीपर लक्ष्य साधा । साथ ही बीजेपीकी हिन्दुत्वकी राजनीतिपर टिप्पणी भी की । इस अवसरपर ममता बनर्जीने चण्डीपाठ किया और शिवकी भी स्तुति की ।
ममता बनर्जीने कहा कि मुझे बाहरी कहा जाता है, क्या गुजरातके लोग बाहरी नहीं हैं ? यदि मैं बाहरकी हूं, तो मुख्यमन्त्री कैसे हूं ? मेरे साथ ‘हिन्दू कार्ड’ नहीं खेलें ! मैं भी हिन्दू बेटी हूं । पहले आप बताएं कि आप हिन्दू हैं या नहीं ? मैं भी प्रातः घरसे चण्डीपाठ करके ही निकलती हूं । मुझसे हिन्दू धर्मको लेकर प्रतियोगिता करें !
भाजपाके पितृपुरुष श्यामा प्रसाद मुखर्जीको स्मरण करते हुए कहा कि उनके योगदानके बिना हमारा भारत एक इस्लामी मुल्क बन गया होता । उन्होंने कहा कि यदि मुखर्जी नहीं होते तो हम बांग्लादेशमें रह रहे होते । बेहलाके मुचिपारामें आयोजित ‘रैली’में उन्होंने ये बातें कहीं । उन्होंने लोगोंको चेताया कि यदि ‘TMC’ तीसरी बार सत्तामें आ जाती है तो वो बंगालको कश्मीर बना देगी ।
राजनीतिके मदमें चूर ये राजनेता हिन्दू धर्मका उपहास करते हैं, जब सत्ता प्राप्त करनी होती है, तो उसीके शरणमें जाते हैं । ऐसे सत्ताके लोभी, और कपटी राजनेताओंका हिन्दू राष्ट्रमें कोई स्थान नहीं होगा । सभीको इनका बहिष्कार करना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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