मन्दिरोंकी दान पेटीमें निरोध डालनेवाला ईसाई आरोपी देवदास बनाया गया बन्दी
३१ दिसम्बर, २०२१
कर्नाटककी दक्षिण मंगलुरु ‘पुलिस’ने क्षेत्रके विभिन्न हिन्दू मन्दिरोंके दान पेटियों व परिसरोंमें प्रयोग किए गए निरोधको फेंकनेके आरोपमें जॉन देसाईके पुत्र देवदास देसाईको बन्दी बनाया है । इस प्रकारकी अभद्रता करनेवाले आरोपीको ‘पुलिस’ गत १ वर्षसे ढूंढ रही थी । मंगलुरुमें लगभग ५ मन्दिरोंनें परिसरमें प्रयोग किए हुए निरोध मिलनेके पश्चात परिवाद प्रविष्ट कराया था; परन्तु ‘पुलिस’ आरोपीका पता लगानेमें सफलता प्राप्त नहीं कर पा रही थी । गत २७ दिसम्बरको कोरज्जान कट्टे गांवके एक मन्दिरमें दान पेटीमें प्रयोग किया हुआ निरोध मिलनेके पश्चात ही इस व्यक्तिको पकडा गया । ‘पुलिस’ने मन्दिर और क्षेत्रकी ‘सीसीटीवी फुटेज’की सहायतासे व्यक्तिको चिह्नितकर बन्दी बनाया है । आरोपीने अपना कुकर्म स्वीकार करते हुए बताया कि उसने १८ स्थानोंको अपवित्र किया है, जिसमें गुरुद्वारे व ‘मस्जिद’ भी सम्मिलित हैं । देसाई गत २२ वर्षोंसे मंगलुरूमें रह रहा है तथा पूर्वमें ‘ऑटो’ चालकका कार्य करता था । अपने पिताके दिनोंसे ही वह ईसाई पन्थका पालन करता है । वहीं कारण पूछे जानेपर उसने बताया कि वह गत १५ वर्षोंसे यीशुके सन्देशोंका प्रचार कर रहा है; क्योंकि उसके अनुसार बाइबल कहती है कि यीशुके अतिरिक्त और कोई भगवान नहीं है; इसलिए वह अशुद्ध वस्तुओंको अपवित्र स्थानोंपर ही फेंक रहा था । आरोपीकी आयु ६२ वर्षकी हैं । उल्लेखनीय हैं इस वर्ष जनवरीमें मंगलुरुमें उल्लालके कोरगज्जा गुलिगाजा देवस्थानमकी हुंडीसे ईसाई सन्देशोंके साथ तत्कालीन मुख्यमन्त्री बीएस येदियुरप्पा एवं उनके पुत्र बिवाई विजयेंद्रके विकृत छायाचित्रोंके साथ निरोध प्राप्त हुए थे । अब इस बातकी पुष्टिकी जा सकती है कि यह प्रकरणके पीछे देवदास देसाईका ही हाथ था ।
ऐसें मूर्खता भरें कृत्य करनेवाले लोगोंके साथ किसी प्रकारकी भी उदारता नहीं करनी चाहिए एवं उन्हें उचित दण्ड देना चाहिए, जिससे ऐसे पन्थोंके अन्य धर्मान्धोंके मनमें भी दण्डको देखकर भयका निर्माण हो । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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