अक्तूबर १२, २०१८
सेनासे भिडन्तमें मारे गए आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीनका प्रमुख एवं पूर्व छात्र मन्नान बशीर वानीको कुछ छात्रोंने ‘शहीद’ घोषित कर नमाज पढनेके प्रयासमें वरिष्ठ छात्र कश्मीरी छात्रोंके विरोधमें खडे हो गए ।
इस मध्य कश्मीरके कुछ छात्रों एवं प्रॉक्टोरियल दलके मध्य कहासुनी हुई । बादमें सुरक्षाकर्मियोंने छात्रोंको दौडाकर भगा दिया । वरिष्ठ छात्रोंसे भी कश्मीरके कुछ छात्रोंकी बहस भी हुई । अनुशासनहीनताके प्रकरणमें तीन छात्रोंको निलम्बित कर दिया गया है । वहीं चार कश्मीरी छात्रोंको ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया है ।
सेनासे भिडन्तमें मन्नान वानीके मारे जानेकी सूचना मिलनेके पश्चात कश्मीरके छात्र गोलबंन्द होने लगे । देखते-देखते सामाजिक प्रसार माध्यमपर (सोशल मीडिया) ‘मन्नान भाई’को शहीद घोषित कर साढे तीन बजे कैनेडी हॉल परिसरमें नमाजका आयोजनकी सूचना दी गई । निर्धारित समयपर लगभग १५० कश्मीरके छात्र एकत्र हो गए । प्रॉक्टोरियल दल भी दल-बलके साथ कैनेडी हॉलके समीप पहुंच गया था ।
एएमयू छात्र संघके पूर्व अध्यक्ष फैजुल हसन सहित अन्य कई सीनियर छात्र भी वहां पहुंच गए । वरिष्ठ छात्रोंको आभास हो गया था कि नमाजके पश्चात एएमयू भी जेएनयूकी भांति पूरे देशमें बदनाम हो जाएगा । उन लोगोंने कश्मीरके छात्रोंको समझानेका प्रयास किया कि यहां नमाज नहीं पढें । कुछ छात्र तो शान्त हो गए; लेकिन कुछ नमाजकी जिदपर अड गए । इसके कारण फैजुल हसनकी कुछ कश्मीरी छात्रोंसे कहासुनी भी हो गई ।
फैजुलका कहना था कि जनाजेकी नमाज पढना है तो मन्नानके घर जाइए । यहांपर सियासत कर एएमयूका नाम बदनाम न करें ! उन्होंने स्पष्ट कह दिया कि एएमयूके छात्र आतंकवादका समर्थन नहीं करेंगे । बादमें कश्मीरके छात्रोंने बैठक कर अपने निर्णय से अवगत करानेकी बात कही । कुछ समय पश्चात फिर कुछ छात्र नमाजकी जिदपर अड गए । छात्रोंकी प्रॉक्टोरियल दलसे कहासुनी हो गई । लाठी धारी सुरक्षाकर्मियोंने छात्रोंको भगा दिया । एएमयू जन सम्पर्क विभागके एमआईसी प्रो. शाफे किदवईने बताया कि नमाज नहीं पढने दिया गया । अनुशासनहीनताके प्रकरणमें तीन छात्रोंको निलम्बित कर दिया है । इसके साथ ही चार कश्मीरी छात्रोंको ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी किया गया है ।
संसदपर आक्रमणका मुखिया अफजल गुरुकी फांसीके पश्चात एएमयूमें कश्मीरी छात्रोंने मौलाना आजाद लाइब्रेरीके बाहर नमाज पढी थी ।
“केवल तीन छात्रोंको ही क्यों ? उन सभी १५० छात्रोकों (आतंकियों) क्यों नहीं, जो राष्ट्र विरुद्ध कार्य कर आतंकीके समर्थनमें एकत्र हुए ! क्या शासनतन्त्रद्वारा उन्हेंं सामूहिक रूपसे दण्ड नहीं मिलना चाहिए, क्योंकि समर्थन करने वाले क्या आतंकी नहीं बनेंगे ?”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
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