जून २०, २०१८
गत वर्ष जूनमें मन्दसौर किसान आन्दोलनमें मृत छह किसानोंकी मृत्युके पश्चात बनी न्यायिक जांच समितिने अपने विवरणमें पुलिस और ‘सीआरपीएफ’को दोषमुक्त किया है ! जांचमें किसानोंपर गोलीबारीको पूर्ण रूपसेे नितान्त आवश्यक और न्यायसंगत बताया है ! जेके जैन आयोगका यह विवरण गत सप्ताह राज्य सरकारको भेज दिया गया है । विवरणमें बताया गया है कि समाज विरोधी तत्वोंने बही पार्श्वनाथ गावंके समीप आन्दोलनको सम्भाला; क्योंकि किसी भी नेताने किसानोंको उपजका सही मूल्य और ऋण मुक्तिके समर्थनमें उन्हें सडकोंपर उतरनेके लिए प्रेरित नहीं किया था । इस मध्य दो प्रदरशनकारी बही पार्श्वनाथमें पुलिस गोलीबारीमें मारे गए, जबकि छह जूनको तीन प्रदर्शनकारी पिपलियामण्डीके बाहर मारे गए !
विवरणमें आगे लिखा गया है कि लोगोंके हाथमें लाठियां और शस्त्रोंके अतिरिक्त, लोहेकी छडे, ‘पेट्रोल’से भरी बोतलें थी ! भीडमें कुछ लोग ‘चक्का जाम’में सम्मिलित हो गए । बादमें उन्होंने आठ ‘सीआरपीएफ’के जवानोंको घेर लिया, जो उन्हें रोकनेका प्रयास कर रहे थे । विवरणमें लिखा गया है कि अराजक तत्वोंने जवानोंपर पत्थर और पेट्रोल बम फेंके व मारपीट भी की ! इस मध्य जब सिपाही विवेक मिश्राने, जिनकी पतलून और जूते आगमें जल गए, स्वयंकी रक्षा हेतु जब पानीमें छलांग लगा दी तो भीडने उन्हें बाहर निकाल बन्दूक छीननेका प्रयास किया ।
जेके जैनके विवरणके अनुसार विजय कुमारने दो बार गोलीबारी की, जिसके कारण कन्हैयालाल और पूनमचन्द और बबलूकी मृत्यु हो गई ! ‘एएसआई’ शाहजीने तीन बार और सिपाही अरुण कुमार दो बार गोलीबारी की । विवरण कहता है कि ‘सीआरपीएफ’के जवानों को चोटें नहीं आई; क्योंकि उन्होंने हेलमेट और अन्य सुरक्षा से जुड़े उपकरण पहने थे।
स्रोत : जनसत्ता
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