अगस्त २६, २०१८
कांग्रेसमें निलम्बन रद्द होने के कुछ ही दिवसके भीतर दलके वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर कश्मीरियोंपर वक्तव्य देकर फिर चर्चामें हैं । एक समाचार माध्यम विवरणमें उन्होंने कहा कि भारतीय संविधानसे ‘आर्टिकल ३५ए’को समात नहीं करना चाहिए । इससे कश्मीरी भरभीत नहीं रहेंगे, जो अधिकार गत ९० वर्षसे संविधानमें है, उसे वहीं बने रहने देना चाहिए ।
इसके कुछ समय पश्चात उन्होंने समाचार विभाग ‘एएनआई’से कहा कि कश्मीर वार्तामें बातचीतकी प्रक्रियामें अलगाववादी हुर्रियत नेताओंको भी सम्मिलित करना चाहिए ! उन्होंने कहा है कि कश्मीर भारतका अभिन्न अंग है । मैं यदि यहां आया हूं तो इसका अर्थ है कि मैं कश्मीरके लोगोंको अपना मानता हूं । यदि कोई पृथक होना चाहता है तो हमें उससे बात करनी चाहिए । बातचीतमें सभी वर्गोंको सम्मिलित करना चाहिए । मैं जानता हूं कि ऐसे कई कश्मीरी हैं, जो भारतके साथ रहना चाहते हैं ।
उन्होंने कहा, “मैं गत वर्ष मई माहमें यहां आया था । उस समय हमने हुर्रियतको बातचीतके लिए दावत दी थी । उनके एक नेता आए थे; लेकिन सभी नहीं आ सकते थे; क्योंकि उन्हें ओझल (नजरबन्द) कर दिया गया था । विशेषतः यासीन मलिकसे नहीं मिल पाए थे; इसलिए मैंने शुक्रवारको उनको चलभाष करवाया था और यह पूछा था कि क्या इस बार मैं कश्मीर आ रहा हूं और आपसे मिल सकता हूं तो उन्होंने कहा वह मुझसे दिल्लीमें मिलेंगे । मैं इस बार किसी हुर्रियत नेतासे नहीं मिल रहा हूं । उन्हें हमें बातचीतमें सम्मिलित करना चाहिए ।
इससे पूर्व केन्द्रीय गृह मन्त्री राजनाथ सिंह भी कह चुके हैं कि अलगाववादी वार्ता करनेके लिए आगे आते हैं तो हुर्रियत कांफ्रेंस नेतृत्वके साथ बातचीत करनेके लिए उनका शासन सज्ज है । राजनाथ सिंह यहां एक प्रसार वाहिनीसे कहा था, “मैं पहले ही कह चुका हूं कि हम कश्मीरमें सभी हितधारकोंके साथ वार्ताके लिए सज्ज हैं । यदि हुर्रियत आगे आता है तो हमें उनसे बात करनेमें कोई हानि नहीं ।”
“जब ऐसे विषैले सरीसृप हमने ही पाले हुए है, तब हमें शत्रुओंकी आवश्यकता ही नहीं है । हिन्दू राष्ट्रमें ऐसे द्रोहियोंको कोई स्थान नहीं मिलेगा !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जी न्यूज
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