जनवरी ३, २०१९
मणिपुर पुलिसने अन्तर्राष्ट्रीय मानव तस्करोंसे १२८ लडकों और लडकियोंको बचाया है । इम्फालके नगर पुलिसके एसएचओ बॉबीने कहा कि सूचना मिलनेपर, शुक्रवार, ३१ जनवरीको समाज कल्याण विभागके अधिकारियोंके साथ पुलिसने राजधानीके विभिन्न होटलोंसे १०३ लडकियों और पांच लडकोंको बचाया है ।
पुलिसने बताया कि इनमें लगभग ७३ युवा नेपाली थे । अभियानोंकी अध्यक्षता इंफाल पश्चिमी जनपदके उप-खण्डीय पुलिस अधिकारी संदीप गोपाल दासने की । शनिवार प्रातः, कमांडो और पुलिसके एक संयुक्त दलने तेंगनौपाल जनपदमें म्यांमार सीमाके पास मोरे नगरमें विश्रामालयोंपर छापा मारा और पांच लडकियों और १५ लडकोंको बचाया ।
सूत्रोंने बताया कि लडकियोंको अन्य देशोंमें ले जानेसे बचाया गया । १५ लडकोंसे पूछताछ कर यह ज्ञात करनेका प्रयास किया जा रहा है कि उनका अपहरण हुआ था या वे मानव तस्करी गिरोहके सदस्य हैं । ब्यौरेके अनुसार, युवाओंको पहले म्यांमार ले जाना था और वहांसे दुबई और तदोपरान्त इराक !
‘नेटवर्क लाइफलाइन फाउंडेशन’के सचिव एल. पिशकने कहा कि उन्हें कार्यकर्ताओंने युवाओंकी मणिपुरके रास्ते म्यांमारमें तस्करीके बारेमें सचेत कर दिया गया था । इससे पूर्व ३० जनवरीको देहलीके राजीव नगरमें कार्यकर्ताओंद्वारा बचाई गईं छह लडकियोंने बताया कि कुछ लडकों और लडकियोंको म्यांमार ले जाया जा रहा है । तेंगनौपाल जनपद पुलिस अधीक्षक एस. इबोम्चाने कहा, “हम सीमावर्ती नगरके विश्रामालयों और अन्य संदिग्ध घरोंमें छापेमारी जारी रखेंगे ।’
“अन्तर्राष्ट्रीय मानव तस्कर क्या होता है ? क्या वे बच्चोंको ओझल करके ले जानेवाले थे ? क्या भारतकी सीमासे किसीको ऐसे ही ले जाया जा सकता है ? यह राज्य शासनकी असुरक्षाके कारण ही है ! यह तो पुलिसको सूचना मिली तो उन्हें पकडा गया; परन्तु क्या इससे पूर्व बच्चे ले जाए नहीं गए होंगें ? अन्यथा तस्कर ऐसा दुस्साहस क्यों करते ? केन्द्र इसमें संज्ञान लें व कार्यवाही करें !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : नभाटा
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