मांसाहारकी ओर बढता हिन्दुस्तान !


क्या आप इस लज्जास्पद तथ्यको जानते हैं कि हमारा आध्यात्मिक भारत देश, मांसाहारकी ओर प्रवृत्त हो रहा है ?

सवा आठ कोटिकी जनसंख्यावाला जर्मनी, जनसंख्याकी दृष्टिसे यूरोपका सबसे बडा और सम्पन्नताकी दृष्टिसे भी एक सबसे अग्रणी देश है, यूरोपमें सर्वोच्च जीवनस्तरवाले देशोंके एक सर्वेक्षणमें वह २०१६ में तीसरे नंबरपर था । सम्पूर्ण रूपसे मांसाहारी संस्कृति और परंपरावाले जर्मनीमें अब कमसे कम १० प्रतिशत लोग शाकाहारी बन गये हैं ! वहीं ‘राष्ट्रीय सैंपल सर्वे ऑफिस’ (एनएसएसओ) के २०११-१२ के आंकडे दिखाते हैं कि उस समय भारतमें लगभग आठ कोटि लोग, अर्थात औसतन हर १३ मेंसे एक भारतीय, गोमांस या भैंसका मांस भी खा रहा था, इन आठ कोटि लोगोंमें सात प्रतिशत सवर्णों सहित सवा कोटि हिंदू थे एवं कुछ वर्ष पश्चात हुए तीन बडे सरकारी सर्वेक्षण कहते हैं कि भारतमें शाकाहारियोंका अनुपात अब केवल २३ से ३७ प्रतिशतके मध्य रह गया है, अर्थात देशमें मांसाहारियोंका अब भारी बहुमत हो गया है ।
अप्रैल २०१८ में प्रकाशित एक अध्ययनके अनुसार सच्चाई यह है कि केवल २० प्रतिशत भारतीय अब शाकाहारी हैं । हिंदू अब सबसे बडा मांसाहारी वर्ग बन गया है ! यही नहीं, १८ कोटि, अर्थात लगभग १५ प्रतिशत भारतीय गोमांसभक्षी हैं ! सरकारी दावेकी अपेक्षा ९६ प्रतिशत अधिक ! यह सब हिन्दुओंको धर्मशिक्षण न देनेका ही परिणाम है, इसे रोकने हेतु हिन्दू राष्ट्रकी स्थापना ही एक मात्र पर्याय है !


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