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मांसाहार क्यों न करें ? (भाग – १२)


मांसाहारसे मांसकी वृद्धिको वैज्ञानिकोंने कर्करोग जैसी व्याधियोंमें ट्यूमरकी वृद्धिके साथ सम्बंधित होनेके प्रमाण पाए हैं । वैज्ञानिकोंके मध्य आहार एवं कर्करोगके मध्यके संबंधको वैज्ञानिकोंने समय-समयपर स्थापित किया है और मांसाहारके कर्करोगसे सीधे सम्बन्धको स्थापित किया है । यह पाया गया है कि जो लोग शाकाहार अपनाते हैं उनमें कर्करोगकी संभावना मांसाहार अपनानेवाले लोगोंकी अपेक्षा कम होती है । अमेरिकन इंस्टीच्युट आफ कैंसर रिसर्चके विभिन्न शोधपत्रोंको देखनेसे यह सम्बन्ध और भी पुष्ट हो जाता है कि मांसाहार कर्करोगकी संभावनाको बढा देता है । जब मांसको पकाया जाता है तो इससे एक विशिष्ट रसायन एच.सी.ए. एवं पी.ए.एच. की उत्पत्ति होती है जिसका सीधा सम्बन्ध कर्करोगसे है । इस बातको प्रमाणित करनेके कई शोध उपलब्ध हैं जिनमेंसे एक शोध यूनीवर्सीटी आफ उटाहमें किया गया है, इस शोधमें ९५२ मलाशय(रेक्टल) कर्करोगियों एवं १२०५  कंट्रोल सब्जेक्ट्सको लिया गया और यह पाया गया कि प्रोसेस्ड एवं पकाए गए मांसको खानेवाले लोगोंमें मलाशयके कर्करोग होनेकी संभावना अधिक पायी गई । मांसको पकानेसे पाली-सायक्लिक एरोमेटिक हायड्रोकार्बंसका निर्माण होता है जिन्हें मानवमें कर्करोगकी कोशिकाओंकी उत्पत्तिका एक बडा कारण माना जाता है । इसी प्रकार एक अन्य शोध जिसमें ५२५००००  लोगोंको सम्मिलित किया गया जो डेयरी एवं मांस आदि पदार्थोंसे प्राप्त वसाका(चर्बीका) सेवन कर रहे थे और उनमें पेंक्रीयाटिक कैंसर होनेकी संभावना को देखा गया । इस शोधमें यह पाया गया कि वैसे लोग जो मांसपर आधारित वसाका अधिक सेवन कर रहे थे उनमें पेंक्रीयाटिक कैंसर अधिक पाया गया जबकि जो लोग वनस्पति आधारित वसाका सेवन कर रहे थे उनमें यह संभावना बहुत कम पायी गई । ब्रिटिश जर्नल आफ कैंसरमें प्रकाशित शोधसे भी प्रमाणित होता है कि शाकाहारियोंमें मांसाहारियोंकी अपेक्षा १२ प्रतिशत कम कर्करोग होनेकी संभावना होती है । इस शोध अध्ययन में ६१००० मांसाहारियों एवं शाकाहारियोंको सम्मिलित किया गया और उनमें १२ वर्षों तक विभिन्न प्रकारके कैंसर जैसे लयूकेमीया, मल्टिपल मायलोमा, होजकिंस लिम्फोमा आदिके होनेको मानिटर किया गया, इस शोधमें भी यह पाया गया कि शाकाहारियोंमें कैंसर होनेकी संभावना ४५ प्रतिशत तक कम हो जाती है । ऑस्ट्रेलिया, जहां सर्वाधिक मांस भोजन खाया जाता है और जहां प्रति व्यक्ति प्रतिवर्ष १३० किलो  गोमांसकी खपत है वहां आंतोंका कर्करोग (कैंसर) सबसे अधिक है । डॉ. एंड्रू गोल्डने अपनी पुस्तकमें शाकाहारी भोजनका ही सुझाव दी है । हमारा हिन्दू धर्मने सदैव ही शाकाहारी होनेकी सीख देता है ! अर्थात जसी आज अनेक शोधके उपरान्त पाश्चात्य वैज्ञानिक प्रमाणित कर रहे हैं उसका प्रतिपादन हमारे मनीषी युगों पूर्व कर चुके हैं इसे ही हिन्दू धर्मकी वैज्ञानिकता सिद्ध होती है !


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