मांसाहार क्यों न करें ? (भाग – ५)


मांस भक्षण एक तमोगुणी कृत्य है एवं यह आहार एक तमोगुणी आहार है, इसकी पुष्टि महाभारत इसप्रकार करता है:
इमे वै मानवा लोके नृशंस मांसगृद्धिनः ।
विसृज्य विविधान भक्ष्यान महारक्षोगणा इव ॥
अपूपान विविधाकारान शाकानि विविधानि च ।
खाण्डवान रसयोगान्न तथेच्छन्ति यथामिषम ॥ (महा० अनु० ११६:१:२)

अर्थ : दुःखकी बात यह है कि जगतमें क्रूर मनुष्य नाना प्रकारके पवित्र खाद्य पदार्थोंको छोडकर आततायी राक्षसकी भांति मांसके लिए लालायित रहते हैं तथा भांति-भांतिके मिष्टान्न (मिठाइयों), भिन्न प्रकारकी शाकों, खाण्डकी बनी हुई वस्तुओं और सरस पदार्थोंको भी वैसा रुचिकर नहीं मानते, जैसा मांसको ।



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