छत्तीसगढमें माओवादियोंके पास मिले दो विदेशी शस्त्रमें स्रोतकी जांचमें जुटी पुलिस


जुलाई २९, २०१८

नई दिल्ली/रायपुर : छत्तीसगढकी पुलिसको शंका है कि माओवादी पूर्वोत्तरके रास्ते राज्यमें अत्याधुनिक विदेशी शस्त्रास्त्रोंकी तस्करी कर रहे हैं । माओवादियोंके गढ बस्तर क्षेत्रसे विदेशमें निर्मित दो अत्याधुनिक बन्दूकोंके प्रथम बार मिलनेके पश्चात पुलिस इसकी जांचमें जुटी है । पुलिसके एक अधिकारीने बताया कि माओवादियोंके साथ सुकमा प्रान्तमें दो मईको हुई भिडन्तके पश्चात जर्मनीमें निर्मित एक बन्दूक मिली थी । इसके अतिरिक्त चार जुलाईको प्रान्तके नारायणपुरसे अमेरिकामें निर्मित ‘सब-मशीनगन’ पाई गई थी ।

पुलिस उप महानिरीक्षक (नक्सल विरोधी अभियान) सुन्दरराज पीने पीटीआईको बताया, ‘‘इस बातकी सम्भावनासे मना नहीं किया जा सकता कि विदेश निर्मित शस्त्र पूर्वोत्तरके रास्ते तस्करीसे यहां पहुंचे, जैसे कि इस सम्बन्धमें गुप्तचर विभागकी सूचना मिली थी ।’’ उन्होंने कहा, ‘‘शस्त्रोंके स्रोतके संज्ञानके लिए जांच आरम्भ कर दी गई है । इससे पूर्व कभी भी बस्तर क्षेत्रसे नक्सलियोंके पास इस प्रकारके शस्त्र नहीं मिले थे ।’’

डीआईजीने बताया कि इससे पूर्व दिसम्बर, २०११ और अप्रैल, २०१४ में माआवोदियोंके पास भिडन्तके पश्चात दो  ७।६५ मिमीके स्वसंचालित (ऑटोमैटिक) बन्दूक मिली थी । यह शस्त्र अमेरिकामें निर्मित थे । आत्समर्पण करने वाले और बन्दी बनाए गए माआवादियोंने प्रश्नोत्तरके (पूछताछके) मध्य यह उजागर किया था कि वह शस्त्र और अत्याधुनिक उपकरण विदेशसे ले रहे हैं ! माओवादियोंने इस प्रकारके शस्त्र सुरक्षाबलोंसे लूटमें भी लिए थे ।

उन्होंने बताया कि गत माह बन्दी बनाया गया माओवादी प्रवक्ता अभय देवदास नायकने पूछताछके मध्य उजागर किया था कि माओवादियोंके शीर्ष नेता कोटेश्वर रावकी मृत्यु से पूर्व २०११ तक विदेशसे शस्त्र और आयुध क्रय किए जाते थे । सुरक्षाबलोंके साथ २०११ में पश्चिम बंगालमें हुई भिडन्तमें माओवादी किशनजी मारा गया था । डीआईजीने कहा कि “नायकके अनुसार लिट्टे (श्रीलंका) और उल्फा जैसे चरमपन्थी संगठनोंसे माओवादियोको पूर्वमें एके-४७, इनसास और एम-१५ बन्दूकोंकी आपूर्ति की गई । साधारणतया माओवादियोंके पास शस्त्र पूर्वोत्तर राज्य असमसे जंगल महलके (पश्चिम बंगाल) रास्ते ओडिशाके मलकानगिरि पहुंचते हैं ।”

स्रोत : जी न्यूज



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