अमुसलमानोंसे विवाहकी ‘शरिया’में स्वीकृति नहीं, ‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ 


०७ अगस्त, २०२१ 
     देहलीमें बुधवार, ०४ अगस्तको ‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ने अन्तर-धार्मिक विवाहके विरुद्ध वक्तव्य जारीकर मुसलमान युवकोंसे मुसलमान समुदायके भीतर ही विवाह करनेका कहा है कि मुसलमान और अमुसलमानके मध्य विवाहको ‘शरिया’ विधानके अनुसार इस्लाममें ‘हराम’ माना गया है । इसके अतिरिक्त यह धार्मिक रूपसे अनुचित है ।
संस्थाके मौलाना खालिद सैफुल्लाह रहमानीने मुसलमान नेताओंसे अन्तरधार्मिक विवाहसे होनेवाली हानियोंके विषयमें नियमित रूपसे इस विषयको उठानेका भी आग्रह किया है । मुसलमान माता-पिताको अपने लडके-लडकियोंके चलभाषपर विशेष ध्यान रखना चाहिए ।
      ‘मुस्लिम पर्नल लॉ बोर्ड’ने कहा बच्चोंका विवाह विशेषकर लडकियोंके विषयमें देरी नहीं करनी चाहिए; परन्तु ‘मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’का यह वक्तव्य ऐसे समयमें आया है, जब ‘लव जिहाद’के बढते विषयोंके कारण देशभरके कई राज्योंमें ‘लव जिहाद’ के विरुद्ध विधान लागू किए जा चुके हैं । उत्तर प्रदेश, गुजरात और मध्य प्रदेश जैसे राज्योंने पहले ही बलपूर्वक धर्मान्तरणके विरुद्ध भी पारित कर दिए हैं ।
      अब तो पूरा विश्व जानता है कि ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’, बलात्कार और धर्मान्तरण इत्यादि  कुकर्मोंका दुष्परिणाम मदरसोंमें दी गई शिक्षा ही है । ऐसे समयमें ऐसे विषयोंपर हिन्दुओं और प्रशासनकी जाग्रति देखकर अपने बचाव हेतु दिया गया वक्तव्य केवल दिखावा भर है । सभी हिन्दुओंको इनसे सदैव दूरी बनाकर रखनी चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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