मस्जिदोंमें छिपे जमातियोंको वहीं दृष्टिबंद (नजरबंद) क्यों नहीं किया जा रहा !


मुझे यह समझमें नहीं आता है कि मस्जिदोंमें छिपे जमातियोंको बाहर निकालकर चिकित्सालयमें क्यों भेजा जा रहा है ? उन्हें वहीं दृष्टिबंद (नजरबंद) कर मरनेके लिए क्यों नहीं छोडा जा रहा है ! इस देशके चिकित्सक ऐसे राष्ट्रद्रोही व आसुरी प्रवृत्तिके लोगोंकी चिकित्सा कर क्यों रहे हैं ? वे इनका बहिष्कार क्यों नहीं कर रहे हैं ? क्या समाजके लोग अपनी परिश्रमसे उपजे धनको ऐसे असुरोंको बचाने हेतु दे रहे हैं ? वे इसका विरोध क्यों नहीं कर रहे हैं ? वस्तुत: इन्हें तो त्वरित गोली मार देनी चाहिए जिससे ऐसे अन्य राष्ट्रद्रोही धर्मान्धोंको सीख मिले ! क्यों हमारे देशका अमूल्य धन, अन्नको इनपर व्यय किया जा रहा है ? क्यों पुलिस और चिकित्सकीय वर्ग, इन मलेच्छोंके लिए अपने प्राण संकटमें डाल रहे हैं ? यह कैसा तुष्टिकरण है मोदीजी !



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