इस्लाममें वैवाहिक दुष्कर्म और यौन दासताको मान्य बताते मौलवी शब्बीरका दृश्यपट सार्वजनिक
३० अगस्त, २०२१
इन दिनों ‘सोशल मीडिया’पर एक दृश्यपट सार्वजनिक हो रहा है, इसमें कनाडामें एक इस्लामी धर्मगुरुको इस्लामके सन्दर्भमें ‘वैवाहिक दुष्कर्म’को उचित बताते हुए देखा जा सकता है । दृश्यपटमें दिखाई देनेवाले मौलवीका नाम शब्बीर अली है । वह कनाडामें इस्लामी विद्वान और ‘इमाम’ है ।
इस विवादित दृश्यपटका शीर्षक ‘The Historical Roots of Female Slavery’ है; यद्यपि यह दृश्यपट सितम्बर २०१६ का है; परन्तु कुछ समय पूर्व इसे ‘Ex-Muslims of North America’ नामक ‘ट्विटर हैंडल’से साझा किया गया । सार्वजनिक दृश्यपटमें शब्बीर अलीने ‘विवाहमें महिलाओंकी सहमतिका अधिकार’, ‘इस्लाममें यौन दासत्व’ और ‘आईएसआईएस’में धार्मिक मान्यताओंका निहितार्थ, जैसे अभिप्रायोंपर विस्तृत वार्ता की ।
इसके अतिरिक्त उसने ‘कुरान’के व्याख्याकारोंका उदाहरण देते हुए प्रतिवाद (दावा) किया कि इस्लामकी दृष्टिमें ‘वैवाहिक दुष्कर्म’को भी उचित बताया गया है । शब्बीर अलीने कहा, “कुछ लोगोंका कहना है कि पति अपनी पत्नीको विवश कर सकता है और वह नकार नहीं सकती; क्योंकि यह उसका अधिकार है ।” पुनः उसने यह प्रतिवाद (दावा) करके इसे तुच्छ बतानेका प्रयास किया, उसने कहा कि वैवाहिक दुष्कर्म एक आदर्श स्थिति नहीं है; परन्तु आगे यह भी कहा कि यह महिलाओंका कर्तव्य है कि वह सभी परिस्थितियोंमें सहयोगी बने ।
उसने कहा कि पैगम्बर मुहम्मदने कहा है कि अल्लाह पुरुषोंके कर्म तब देखता है, जब उनका महिलाओंपर अधिकार होता है । इतना ही नहीं, अलीने यह भी प्रतिवाद (दावा) किया कि महिलाएं उनके साथ दासोंकी भांति हैं ।
इस्लाममें इस प्रकारके कुकृत्य अत्यन्त निन्दनीय है । ऐसे पन्थका अन्त ही मानवजातिके लिए उत्तम होगा । जिस धर्ममें अपनी पत्नीको भोगकी दृष्टिसे देखनेका प्रतिनिधित्व उस पन्थके मौलवी करते हो, ऐसे पन्थ सर्वथा अकल्याणकारी ही होंगे । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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