सिलवासाके ‘मदरसे’में ‘मौलवी’ शेख मोहम्मद तारिकने अवयस्क छात्रासे किया यौनाचार, भोजन-पानीके बिना दो दिवसोंतक बन्धक बनाकर रखा


२७ नवम्बर, २०२१
‌      दादरा नगर ‘हवेली’के सिलवासा स्थित एक ‘मदरसा’के छात्रावासमें रहकर पढनेवाली अवयस्क युवतीने ‘मदरसे’के ‘मौलवी’पर छात्रावासमें ही यौनाचारका आरोप लगाया है । परिवाद मिलनेके बाद ‘पुलिस’ने आरोपित ‘मौलवी’ शेख मोहम्मद तारिकको बाल अपराध लैंगिक अधिनियममें कार्यवाही करते हुए बन्दी बना लिया है । पीडिताकी आयु १७ वर्ष है । वहीं, ‘मौलवी’की पत्नीने अपने पतिको निर्दोष बताया है । ‘मौलवी’की पत्नीका कहना है कि यदि आरोप सत्य सिद्ध हुए तो वह पतिसे सम्बन्ध-विच्छेद कर लेगी ।
      समाचार माध्यमोंके अनुसार, छात्रा ‘मदरसे’के छात्रावासमें रहकर पढाई करती थी । इसी मध्य ‘मौलवी’ने उसे डराकर उसके साथ यौनाचार किया । छात्राने अपने परिजनको रुग्ण होनेके सूचना देकर दूरभाष किया और ‘मदरसे’में बुलाया । परिजनके पहुंचनेके बाद उसने घटनाके विषयमें जानकारी दी । परिजनने ‘मौलवी’का परिवाद ‘पुलिस’में किया, जिसके पश्चात ‘पुलिस’ने पीडिताका चिकित्सीय परीक्षण करवाया । प्रतिवेदनमें दुष्कर्मकी पुष्टि हो जानेपर ‘मौलवी’को बन्दी बना लिया गया ।
      घटनाके बाद आक्रोशित होकर ‘मौलवी’के विरुद्ध कडी कार्यवाहीकी मांग की है । वही, घटना सामने आनेसे इस बातकी भी आशङ्का व्यक्त की जा रही है कि ‘मौलवी’ने छात्रावासकी अन्य युवतियोंका भी यौन शोषण तो नहीं किया है । प्राय: इस प्रकारकी घटनाओंको लोक-लाजके कारण दबा दिया जाता है ।
      पीडिताके पिताने बताया, मेरी अवयस्क बेटी ‘मदरसे’के ४० वर्षीय ‘मौलवी’की बेटी जैसी है । वह ‘मदरसे’में ज्ञान लेने गई थी । मेरी बेटीका ही मन था कि उसे आलिमा पढना है । इसीलिए मैंने उसका नाम यहां लिखवाया था । दुष्कर्मके उपरान्त मेरी बेटीको २ दिन बन्दी बनाकर रखा गया । उसको भोजन-पानी नहीं दिया गया ।
      धर्मान्ध जिहादियोंसे महिलाएं किसी भी धर्म, वर्ग या आयुकी हों, सुरक्षित नहीं हैं । विधिक कार्यवाहीसे भयमुक्त ‘मौलवी’ तथाकथित शिक्षाके मन्दिरको भी अपवित्र करनेसे पीछे नहीं हटते । महिला सुरक्षा एवं सर्व ओर सुख-शान्तिके लिए हिन्दूराष्ट्र कितना आवश्यक है, यह कुकर्मी धर्मान्ध जिहादियोंके कृत्योंसे ज्ञात होता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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