अगस्त १८, २०१८
विश्वमें हिन्दी भाषाकी पहुंचको बढावा देनेके उद्देश्यसे मॉरीशसकी राजधानी पोर्ट लुईसमें ११वां विश्व हिन्दी सम्मेलन शनिवारसे आरम्भ हो गया । इस सम्मेलनमें भारतके पूर्व प्रधानमन्त्री अटल बिहारी वाजपेयीको मॉरीशसने श्रद्धाञ्जलि दी है । मॉरीशसके प्रधानमन्त्री प्रवीण कुमार जगन्नाथने घोषणा की है कि जिस साइबर टावरके निर्माणमें अटलजीने सहयोग प्रदान किया था, अब उस टावरका नाम ‘अटल बिहारी वाजपेयी टावर’ होगा ।
सम्मेलनके आरम्भमें वाजपेयीको श्रद्धाञ्जलि देनेके लिए दो मिनटका मौन रखा गया । इस अवसरपर विदेश मन्त्री सुषमा स्वराज भी उपस्थित थीं । सम्मेलनका उद्घाटन मॉरीशसके प्रधानमन्त्री प्रवीण कुमार जगन्नाथने किया । इस वर्ष विश्व हिन्दी सम्मेलनका विषय है – ‘हिन्दीकी दुनिया और भारतीय संस्कृति ।’
ऐसा इस बार प्रथम बार हुआ है, जिसमें आधिकारिक प्रतिनिधिमण्डलके सदस्योंके लिए विशेष विमानका प्रबन्ध किया गया । लगभग २९० सदस्य पोर्ट लुईस पहुंचे हैं । साथ ही यह भी प्रथम बार हुआ है, जब दिल्ली, चण्डीगढ और पुडुचेरी सहित २९ राज्यों/केन्द्रशासित प्रदेशोंके प्रतिनिधि इस सम्मेलनमें भाग लेने आए है ।
लगभग २० देशोंसे आए २००० सदस्यों वाले इस तीन दिवसके सम्मेलनमें ‘हिन्दी की दुनिया और भारतीय संस्कृति’पर आठ उपविषयोंपर व्याख्यान दिए जाएंगे ! साथ ही वाजपेयी जीके साहित्यपर २ घण्टेका विशेष सत्र भी होगा ।
नरेन्द्र मोदीने इस सम्मेलनकी सफलताके लिए शुभकामनाएं दी हैं । मोदीने अपने सन्देशमें कहा है कि मैं आश्वस्त हूं कि यह सम्मेलन हिन्दीके प्रयोगको बढावा देनेमें सहायक होगा और सम्पूर्ण विश्वमें हिन्दीकी महत्वपूर्ण भूमिकाकी समझ बढेगी ।
इस सम्मेलनमे गोवाकी राज्यपाल मृदुला सिन्हा और पश्चिम बंगालके राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी भी भाग लेने पहुंचे हैं । हिन्दी भाष को सेवा और सूचनाका माध्यम बनानेके लिए विश्व हिन्दी सम्मेलनका आरम्भ वर्ष १९७५ में हुआ था । तब से अब तक हिन्दीने काफी प्रसिद्धि प्राप्त की है और आज विश्वमें बोली जाने वाली भाषाओंमें हिन्द का स्थान अग्रणी है ।
मॉरिशसके प्रधानमन्त्रीने ११वें विश्व हिन्दी सम्मेलनके अवसरपर दो डाक टिकट जारी किए । एकपर भारत एवं मॉरिशसके राष्ट्रीय ध्वज और दूसरेपर दोनों देशोंके राष्ट्रीय पक्षी मोर और डोडोका चित्र है ।
स्रोत : जी न्यूज
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