‘मस्जिद’में पढने आए अवयस्क बालकसे दुष्कर्मका प्रयास, ‘मीडिया’ने ‘धार्मिक स्थल’ बताकर किया भ्रमित
२० सितम्बर, २०२१
राजस्थानके बीकानेर जनपदके धोबी तलाई स्थित, एक ‘मस्जिद’में अवयस्क बालकके साथ दुष्कर्म करनेके प्रयासका प्रकरण उजागर हुआ है । प्रकरण १८ सितम्बर २०२१ का है । आरोपी ‘मस्जिद’में ‘अजान’ देता है व उसका अभिज्ञान (पहचान) मोहम्मद आबिदके रूपमें हुआ है । समाचारके अनुसार, ‘मस्जिद’में उस दिवस पढने आए बालकको आबिदने सर्वप्रथम रोका व बालकके वस्त्र उतारकर, उसे शय्यापर लेटा दिया; तत्पश्चात, स्वयं भी वस्त्र उतारकर कुकर्मका प्रयास करने लगा । इसी मध्य, बालक भयभीत हो गया व मूत्र त्यागनेका बहाना बनाकर, वहांसे भाग निकला । घर पहुंचकर, उसने सम्पूर्ण प्रकरण अपने परिवारको बताया, तब उन्होंने आरोपीके विरुद्ध ‘पुलिस’में परिवाद प्रविष्ट किया । कोटगेट ‘थाना’ क्षेत्रके ‘सीआई’ मनोज माजराने बताया कि प्रकरणके आरोपीको बन्दी बनाया है व ‘पोक्सो एक्ट’के अन्तर्गत, अभियोग प्रविष्ट किया गया है; परन्तु इसमें चकित करनेवाली बात यह है कि स्पष्ट रूपसे प्रकरण ‘मस्जिद-मदरसे’से जुडा होनेपर भी, लोगोंको भ्रमित करने हेतु, समाचारपत्रोंने ‘मस्जिद’को ‘धार्मिक स्थल’ कहकर सम्बोधित किया हैं !
समाचारपत्र, ‘दैनिक भास्कर’ व ‘राजस्थान पत्रिका’ने, ‘मस्जिद’के स्थानपर समाचारपत्रमें ‘धार्मिक स्थल’ प्रयोग किया व सत्यको छुपानेका प्रयास किया । उल्लेखनीय है कि जून २०२१ में उत्तर पूर्वी देहलीके हर्ष विहारमें एक मस्जिदमें दुष्कर्मका प्रकरण भी सामने आया था । यहां जल भरने गई १२ वर्षकी बालिकाके साथ इलयासनें दुष्कर्म किया था ।
जो समाचारपत्र सत्यको उजागर करनेके स्थानपर असत्य प्रसारित करता है, वह पत्रकारिता नहीं; अपितु चाटुकारिता करता है । असत्य प्रकाशित करनेवाले ऐसे समाचारपत्रोंके विरुद्ध कठोर कार्यवाही होनी चाहिए । वहीं, हिन्दुओंको भी ऐसे समाचारपत्रोंको पढना, पूर्णतः त्यागना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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