अक्तूबर १९, २०१८
पाकिस्तानसे आए एक चलभाषने मेरठ सैन्य क्षेत्रमें (कैंटमें) तैनात लगभग २६ वर्षके फौजीको ‘आईएसआई’के चंगुलमें फंसा दिया । मिली सूचनाके अनुसार जवानके पास पहले पाकिस्तानके एक चलभाष क्रमांकसे फोन आया, तत्पश्चात उसने जवानको ‘व्हाट्सएप’पर ले लिया और सन्देश भेजना आरम्भ हो गया । बातचीत जासूसी तक जा पहुंची । फौजी कंचन सिंहकी आयु लगभग २७ वर्ष है ।
सूत्रोंके अनुसार पाकिस्तानी गुप्तचर दलाल फौजके जवानों और युवाओंको चलभाषकेद्वारा चंगुलमें लेते हैं । साधारणतया इसके लिए मधुर आवाज वाली सुन्दर महिलाओंको प्रयोग किया जाता है । यह महिलाएं फोन करती हैं और फिर ‘व्हाट्सएप’पर जोडकर सन्देश भेजना आरम्भ करती हैं, तत्पश्चात यह प्रकरण ही ब्रेन वॉश तक ले जाता है । सूत्रोंके अनुसार प्रथम बार सेनाके इस जवानके पास भी पाकिस्तानसे एक चलभाष आया, दूसरी ओर आवाज महिलाकी ही थी । इसके पश्चात सन्देश भेजना आरम्भ हुआ और चित्रोंका आदान-प्रदान भी ! ‘आईएसआई’ दलालोंने जवानको इसप्रकार चंगुलमें ले लिया कि वह बेबस हो ब्रेन वॉशकी स्थिति तक चला गया । ‘आईएसआई’ दलालने उसे जो कहा वह करता चला गया । कैंट क्षेत्रके चित्रोंका आदान-प्रदान और अन्त गुप्त सूचनाएं भी सांझा होने लगीं । जांच विभागके पास यह भी समाचार है कि इसमें पैसेका भी लेनदेन हुआ ! सम्भवत: फौजीके कुछ खातोंमें ऑनलाइन पैसा भेजा गया !
यह भी देखा जा रहा है कि कंचन सिंहने कहीं फर्जी नामोंसे फेसबुक आईडी तो नहीं बना रखी हैं, जिनसे वह ‘आईएसआई’ दलालोंको सूचनाएं भेजता हो । मेरठ सहित पश्चिमी उत्तरप्रदेशमें ‘आईएसआई’का बडा जाल है ।
उत्तराखण्डके बागेश्वरके बिलौनी गांवका रहने वाला यह फौजी अविवाहित है । बिलौनी एक ऐसा गांव है, जो बागेश्वरसे सटा है और यहां खेती-मजदूरी करने वाले निर्धन लोग रहते हैं । कंचन सिंह भी आर्थिक रूपसे निर्धन परिवारसे फौजमें आया । माना जा रहा है कि उसकी इसी दुर्बलताका आईएसआई दलालोंने लाभ उठाया ।
“ वस्तुतः ऐसी घटनाओंका मूल क्या है ? धर्मशिक्षण व राष्ट्रप्रेमका अभाव, जो आधुनिक मैकॉले प्रणालीमें नहीं सिखाया जाता ! युवा केवल सतही ज्ञानकी पुस्तकें पढकर आते है और सर्व अनुचित कृत्य करते हैं !- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान
Leave a Reply