महबूबा मुफ्तीने की ‘तालिबान’ शासनकी प्रशंसा, लोगोंने कहा, ‘इन्हें भेज दो अफगानिस्तान’
८ सिंतबर, २०२१
अफगानिस्तानमें ‘तालिबान’ शासनकी घोषणके पश्चात, कुछ कश्मीरके नेता अब ‘तालिबान’का गुणगान कर रहे हैं । फारूक अब्दुल्लाके पश्चात, अब महबूबा मुफ्तीने इस विषयपर वक्तव्य दिया कि ‘तालिबान’ वास्तविकता बनकर सामने आ रहा है एवं उन्होंने वहां ‘शरिया’को क्रियान्वित करनेके सुझाव दिए हैं । ऐसेमें, यदि वह अपनी छविको परिवर्तित करता है तो विश्वके लिए उदाहरण बन सकता है । आजतकके प्रतिवेदनके (रिपोर्टके) अनुसार, मुफ्ती कहती हैं, “यदि ‘तालिबान’ अतीतके हथकण्डोंको अपनाएगा तो पुनः, समस्त विश्वके लिए ही नहीं; अपितु अफगानिस्तानकी जनताके लिए भी घातक हो जाएगा ।”
महबूबा मुफ्ती और अब्दुल्ला जैसे नेताओंसे, ‘तालिबान’के पक्षमें वक्तव्य सुननेके पश्चात, सार्वजनिक जालस्थलपर उपयोगकर्ता (यूजर) क्रोधित हुए हैं । एक ‘यूजर’ लिखता है, “मैं भारत शासनसे अनुरोध करता हूं कि इन्हें अफगानिस्तान भेजें, जिससे वे ‘तालिबान’ शासनमें सुखसे जिएं । ८ माहकी गर्भवती महिलाकी हत्या देखनेके पश्चात भी ऐसे बोल रही हैं । भगवान ऐसे लोगोंसे जम्मू-कश्मीरकी रक्षा करें ।”
ऐसे मूढतापूर्ण वक्तव्य एवं अपेक्षाएं दिवास्वप्नकी भांति हैं और ये इसलिए देखे जाते हैं; क्योंकि भारतमें इन्हें देखनेकी स्वतन्त्रता, ‘अभिव्यक्तिकी स्वतन्त्रता’के नामपर है । कोई भी अधिकार, देशहितसे ऊपर नहीं है; अतः कथित अभिव्यक्ति स्वतन्त्रतापर नियन्त्रणकी आवश्यकता है । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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