जुलाई १३, २०१८
जम्मू-कश्मीरकी पूर्व मुख्यमन्त्री महबूबा मुफ्तीने केन्द्र शासनको ‘पीपुल्स डेमोक्रेटिक दल’में (पीडीपी) तोडफोड करनेपर चेतावनी दी ! उन्होंने शुक्रवारको कहा, “१९८७ की भांति यदि दिल्लीने यहांकी (जम्मू-कश्मीर) जनताके मतदानके अधिकारको छीननेका प्रयास किया या किसी तरहकी जोडतोडका प्रयास किया तो यहां सैयद सलाहुद्दीन और यासीन मलिक पैदा होंगे ! मैं समझती हूं कि केन्द्रकी सहायताके बिना दलमें तोडफोड नहीं की जा सकती !”
१९ जूनको भाजपाने महबूबा शासनसे समर्थन वापस लिया था । पीडीपीमें विरोध आरम्भ हो गए हैं । पांच विधायक पीडीपी नेतृत्वके विरुद्ध वक्तव्य दे चुके हैं । इनमें बारामूलाके विधायक जावेद हसन बेग, विधायक आबिद हुसैन अंसारी, उनके भतीजे इमरान हुसैन अंसारी, तंगमार्गसे विधायक मोहम्मद अब्बास वानी और पट्टनसे विधायक इमरान अंसारीका नाम सम्मिलित है ।
सलाहुद्दीन और मलिकका वर्णन क्यों किया ? सैयद सलाहुद्दीन हिजबुल मुजाहिदीनका मुख्य है । उसने १९९० में अपना नाम यूसुफ शाहसे बदलकर सैयद सलाहुद्दीन कर लिया । सलाहुद्दीनने १९८७ में विधानसभा चुनाव लडा, लेकिन पराजित हुआ । उसका कहना था कि उससे छल किया गया ! लोगोंको मत नहीं डालने दिया गया। उस समय सलाहुद्दीनने कहा था, ”हम शान्तिपूर्ण ढंगसे विधानसभामें जाना चाहते थे; लेकिन हमें ऐसा नहीं करने दिया गया, हमें बन्दी बनाया गया और आवाजको दबानेका प्रयास किया । कश्मीरके लिए शस्त्र उठानेके अतिरिक्त हमारे पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है !” अमेरिकाने भी सलाहुद्दीनको ग्लोबल आतंकी घोषित किया है । वहीं, यासीन मलिक ‘जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रण्ट’का (जेकेएलएफ) प्रमुख है । वह कश्मीरको भारतसे भिन्न करनेकी बातें करता रहा है !
केन्द्रीय मन्त्री मुख्तार अब्बास नकवीने कहा, “महबूबाका कथन बताता है कि वे आतंकियोंको प्राणवायु देनेका प्रयास कर रही हैं । जाने-अनजाने उन्होंने ये बता दिया कि वे अलगाववादियोंके प्रति सहानुभूति रखती हैं !” जम्मू-कश्मीरके उपमुख्यमन्त्री रहे कविन्दर गुप्ताने कहा, “कुछ दिवस पूर्वतक वे राज्यकी मुख्यमन्त्री थीं और आज वे आतंकी विद्रोहकी चेतावनी दे रही हैं !” उमर अब्दुल्लाने ‘ट्वीट’ किया, “पीडीपीके टूटनेसे कोई नूतन आतंकी नहीं बनने जा रहा । लोग केवल कश्मीरियोंके मतोंको विभाजित करनेके लिए दिल्लीमें बनाए दलके निधनका शोक नहीं मनाएंगे ।”
स्रोत : दैनिक भास्कर
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