‘महाभारत घरमें न रखें’, यह एक भ्रान्ति है !
कुछ अज्ञानी कहते हैं कि घरमें महाभारत नहीं रखना चाहिए ? महाभारत एक दिव्य ग्रन्थ है उसका पठन एवं पाठन क्यों करना चाहिए ?, उसी ग्रन्थमें लिखा है –
श्रद्दधानः सदा युक्तः सदा धर्मपरायणः ।
आसेवन्निममध्यायं नर: पापात् प्रमुच्यते ।। (आदिपर्व, प्रथम अध्याय, श्लोक)
जो धर्मपरायण पुरुष श्रद्धाके साथ सर्वदा सावधान रहकर प्रतिदिन इस अध्यायका सेवन करता है वह पाप-तापसे मुक्त हो जाता है ।अर्थात मात्र प्रथम अध्यायका जो पाठ कर लेता है उसे इतना लाभ मिल सकता है तो सम्पूर्ण शास्त्रका अभ्यास करनेसे कितना लाभ मिलेगा !
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