फरवरी २६, २०१९
भारतीय वायुसेनाद्वारा पाकिस्तानमें की गई ‘सर्जिकल स्ट्राइक’के साथ ही बालाकोट समाचारोंमें आ गया है । आंतकी संगठन ‘जैश ए मोहम्मद’का वृहद स्थल रहा बालाकोट पहले भी ऐसे तत्त्वोंका निवास रहा है । लगभग २०० वर्ष पूर्व महाराजा रणजीत सिंहकी फौजने बालाकोटसे आतंकी तत्त्वोंपर कार्यवाहीकर उनको नष्ट किया था !
दक्षिण एशियामें कथित जिहाद और ‘जिहादियों’का पहला अड्डा बालाकोट था । यहींपर महाराजा रणजीत सिंहकी सेनाने वर्ष १८३१ में सैयद अहमद शाह बरेलवीको मारकर पेशावरपर अधिकार किया था । उस समय शाहने स्वयंको इमाम घोषितकर प्रथम बार वर्तमान समझके अनुसार ‘जिहाद’ आरम्भ किया था । शाह और उसके कथित जिहादी बालाकोटमें १८२४ से १८३१ तक सक्रिय रहे थे ।
इसका वर्णन पाकिस्तानी लेखिका आयशा जलालने अपनी पुस्तक ‘पार्टिजंस ऑफ अल्लाह’में भी किया है । सैयद अहमद शाह बरेलवीका स्वप्न भारतीय उपमहाद्वीपमें इस्लामिक राज्य स्थापित करना था । इसी उद्देश्यसे उसने सहस्रों ‘जिहादियों’को महाराजा रणजीत सिंहकी सेनाके विरुद्घ एकत्र किया था । उसने स्वयंको इमाम घोषित कर रखा था । शाहने महाराजकी नाकमें दम कर रखा था । यही कारण है कि महाराजाके पुत्र शेरकी अध्यक्षतामें शाहके मारे जानेके पश्चात ही उन्होंने पेशावरको अपने राज्यमें जोडा था ।
जैसे आज पाकिस्तान जिहादियोंको भारतके विरुद्घ आश्रय दे रहा है, वैसे ही १६० वर्ष पूर्व अंग्रेजोंने सैयद अहमद शाहको महाराजा रणजीत सिंहके विरुद्घ आश्रय दिया था । अंग्रेजोंका मानना था कि वहाबी शाह और उसके मित्र सिख राजको दुर्बल करके उन्हें लाभ पहुंचाएगा । उसे इस क्षेत्रमें ‘जिहादी’ गतिविधियों चलानेकी पूरी छूट दी गई थी ।
सैयद अहमद शाह और उसके साथियोंकी कब्रें आज भी बालाकोटमें हैं । इन्हें बहुत पवित्र भी माना जाता है । ‘वल्र्ड ट्रेड सेंटर’में अलकायदाके आक्रमणके पश्चात जब अमेरिकाने अफगानिस्तानपर आक्रमण कर दिया तो आतंकी संगठन ‘जैश-ए-मोहम्मद’को अपना निवास वहांसे स्थानान्तरित करना पडा । बालाकोटकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमिको देखते हुए ही सम्भवतः जैशने अपने आतंकवादियोंके प्रशिक्षणके लिए यहां अपना प्रशिक्षण केंद्र खोला । यह केन्द्र लोगोंकी पहुंचसे दूर एक पहाडकी चोटीपर था, जिसे भारतीय वायुसेनाने नष्ट कर दिया है ।
“जिसप्रकार शेरे-ए-पंजाब महाराजा रणजीत सिंहने जिहादियोंको नष्ट किया था, आज वही शौर्य भारतीय सेनाने किया है, इस हेतु हमारे वीर सैनिक अभिनन्दनके पात्र हैं; परन्तु अब इन आतंकी जिहादियोंका समूल नाश आवश्यक है, ताकि ये पुनः न उठ पाए और सर्वत्र शान्ति स्थापना हो सकें ! ”-सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : जागरण
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