अप्रैल ४, २०१९
कॉन्ग्रेस नेता सैम पित्रोदाने मध्यम वर्गको अधिक कर (टैक्स) देनेके लिए सज्ज रहनेको कहा है । यह कर राहुल गांधीकी महत्वाकांक्षी समाजवादी योजना ‘न्याय’के लिए आर्थिक व्यव्स्था करनेके लिए लगेगा । साथ ही उन्होंने मध्यम वर्गकी इस योजनाको लेकर कर वृद्धिकी आशंकाको ‘स्वार्थी’ भी बता दिया !
उल्लेखनीय है कि राहुल गांधीने इस योजनाके अन्तर्गत निर्धनोंको ७२,००० प्रति वर्ष देनेका वचन किया था । उसके पश्चात इसको लेकर जहां कॉन्ग्रेस नेताओंके वक्तव्योंमें आपसी विरोधाभास रहा है, वहीं मध्यम वर्गसे लेकर भाजपातक इस योजनाकी आलोचनाकर इसे माध्यम वर्गपर आर्थिक बोझ बढानेवाली बता रहे हैं । नीति आयोगके पूर्व उपाध्यक्ष अरविन्द पानगढियाने तो इस योजनाका व्यय भारतके रक्षा बजटसे भी अधिक पहुंच जानेकी आशंका प्रकट की है ।
“India Ahead News” नामक समाचार माध्यमके संवाददातासे बात करते हुए सैम पित्रोदाने यह बात कही । साथ ही उनका मध्यम वर्गकी कर बढनेकी चिंताको ‘स्वार्थी’ कहना मध्यम वर्गकी ग्लानि-ग्रन्थिको जगानेका प्रयास (guilt-tripping) प्रतीत होता है ।
कॉन्ग्रेसकी न्याय योजनाका प्रारूप बनानेमें महत्वपूर्ण परामर्श देनेवाले ‘एमआइटी’, अमेरिकाके अर्थशास्त्री अभिजित बनर्जी भी यह बात पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि कॉन्ग्रेसकी यह योजना कर वृद्धिपर आधारित है ।
“निर्धनोंको ७२,००० रूपये वितरण करने हैं तो मध्यमवर्गीयको, जो शासनकी नीतियोंमें पहलेसे ही पिसा हुआ है, उसे और अधिक कर देना होगा ! यह नीति ‘न्याय’ नीति नहीं ‘पागलपन’ नीति कहलाती है, जिसका परामर्श न ही नीति शास्त्र देता है और न ही कोई न्याय शास्त्र ! देशका मध्यमवर्गीय भी दिन और रात श्रमकर कुछ धन अर्जित करता है, जिससे उसका परिवार चल सकें, उसके पास राजनीतिक दलोंकी भांति जादुई छडी नहीं है, जो बिना कुछ कार्य किए विश्वके १० उच्च धनिकोंमें नाम आ जाए !! वास्तविक न्यायकर्ता ईश्वर है, जिसने सभीको अपने कर्मोंके अनुसार जन्म दिया और उसी स्थितिमें पुरूषार्थ करनेवाले किसी व्यक्तिको वह भूखा नहीं सोने देता है !; परन्तु कांग्रेसकी यह सब कुछ निशुल्क वितरण करनेकी नीति, चाहे वह देशका विभाजनकर वितरण करना हो या फिर धनका, देशके प्राणोंको ही समाप्त कर रही है और यदि यह पारित हो भी जाती है तो यह जन-जनतक नहीं पहुंचेगी, यह पक्का है; क्योंकि कांग्रेस जो आजतक नहीं कर पाई, वह अब कैसे कर देगी ?; अतः देशवासियोंको ऐसी छलावे और भ्रामक नीतियोंसे बचना चाहिए और सत्यको देख उचित चुनाव ही करना चाहिए ! ”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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