दिसम्बर १२, २०१८
लोकतान्त्रिक सुधार समितिके (एडीआरके) विवरणके अनुसार सम्भवत: मिजोरम वह राज्य है, जिसके विधायकोंमेंसे चारको छोड कर शेष सभी ३६ विधायकोंकी औसत सम्पत्ति ४.८४ कोटि रुपये है ! ४० विधायकोंके सदनमें केवल एक महिलाको जीत मिली है।
‘एडीआर’ने सभी विधायकोंके द्वारा मतदानमें नामांकनके समय दिए गए विधायकोंके ब्यौरेके अध्ययनके पश्चात दावा किया है कि राज्यके नूतन चुने गए विधायकोंमेंसे दलोंके हिसाबसे कांग्रेसके विधायकोंकी औसत सम्पत्ति सबसे अधिक ५.३१ कोटि रुपये है । राज्यकी विधानसभामें पांच कांग्रेसी उम्मीदवारोंने विजय प्राप्त की है । यद्यपि एमएनएफके (मिजो नेशनल फ्रंट) २६ उम्मीदवार विजयी हुए हैं, जिनमें २२ करोडपति हैं !
आठ स्वतन्त्र उम्मीदवारों भी विजयी हुए हैं, जिनकी सम्पत्ति भी करोडोंमें है ! भाजपाका यहां एक उम्मीदवार विजयी हुआ है, वह भी करोडपति है !
“यह इस तथाकथित लोकतन्त्रका एक कटु सत्य है । नागरिक जिन्हें स्वयंका ज्ञान नहीं हैं, वे राष्ट्र चलाने हेतु अयोग्य उम्मीदवार चुनकर भेजते हैं और परिणाम आज सबके समक्ष ही है ! कोट्यावधिकी घोषित सम्पत्ति रखनेवालेके पास अघोषित सम्पत्ति कितनी होगी ? इसका अनुमान कठिन है ! और क्या ये लोग निष्ठापूर्वक, पुत्रवत जनताका संरक्षण कर पाएंगे ? यह सोचना भी हास्यास्पद है; अतः धर्मनिष्ठ राज्यकी स्थापना ही एकमात्र पर्याय है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
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