‘हिज्बुल मुजाहिदीन’की कश्मीरियोंको गीदडभभकी, ‘बच्चोंको सेनाके गुडविल विद्यालयमें भेजा तो भुगतना होगा !!’


मई ७, २०१९


आतंकवादी संगठन ‘हिज्बुल मुजाहिदीन’ने दक्षिण कश्मीरके शोपियांमें फलक (पोस्टर) लगाकर स्थानीय लोगोंके लिए चेतावनी जारी की है कि वे अपने बच्चोंको सेनाके ‘गुडविल विद्यालय’में पढने न भेजें । आतंकवादी संगठनने कहा है कि यदि उन्होंने सेनाके विद्यालयमें अपने बच्चोंको पढनेके लिए भेजा तो इसका परिणाम उन्हें भुगतना होगा । आपको बता दें कि ६ मईको निकले सीबीएसई दसवीं कक्षाके परिणाममें सेनाद्वारा संचालित ‘गुडविल विद्यालय’का सौ प्रतिशत परिणाम रहा है ।

जम्मू-कश्मीरके दूर-दराज क्षेत्रोंमें सेना ४३ गुडविल विद्यालय चलाती है । इनमेंसे तीनकी मान्यता ‘सीबीएसई’से है । सेनाके इन ४३ विद्यालयोंमें एक सहस्र कर्मी कार्य करते हैं और लगभग पन्द्रह सहस्र छात्र-छात्राएं पढते हैं । घाटीमें ये विद्यालय सेनाद्वारा संचालित होनेके कारण अशान्तिके समयमें भी खुले रहते हैं । इन विद्यालयोंको ‘ऑपरेशन सद्भावना’के अन्तर्गत संचालित किया जाता है ।


सोमवारको आए सीबीएसई दसवींके परिणाममें यहांके सौ प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए । जम्मू कश्मीरके रजौरी निवासी हित्तम आयूब छात्रने ९४.२ प्रतिशत अंकके साथ क्षेत्रमें उच्चतम स्थान प्राप्त किया । २०१७ में भी पृथकतावादियोंने सेनाके इन विद्यालयोंमें दी जा रही शिक्षाको लक्ष्यपर लिया था ।

पृथकतावादियोंने करेवा, नादपोरा और शोपियांके आसपास क्षेत्रके गांवोंमें कई फलक (पोस्टर) लगाए थे । इनमें उग्रवादी संगठनने चेतावनी दी थी कि ‘मतदानके दिन’ मतदान करनेवालोंको ‘मार दिया जाएगा’ । चेतावनीके पश्चात पुलवामामें २.३८ प्रतिशत मतदान हुआ !

उर्दूमें लगाए गए इन फलकमें (पोस्टरोंमें) लिखा था, “हमें जानकारी मिली है कि सेना आपको वोट डालनेके लिए विवश कर सकती है; परन्तु कश्मीरी लोगोंको समझना चाहिए, फिर चयन करना चाहिए । शोपियांमें मतदानके दिन वोट डालनेवालोंको मार दिया जाएगा !


पुनः लगाए गए फलकमें लिखा है, “हमारे कमांडर रियाज नाइकूने आपको कई बार चुनावोंसे दूर रहनेके लिए कहा है; परन्तु कुछ लोग नहीं सुनते हैं । अब समय समाप्त हो गया है और हम उनके विरुद्घ कार्यवाही करेंगे और उनके विडियोको प्रसारित किया जाएगा ।”


“आतंकी अपनी गीदड भभकीसे लोगोंमें भयका संचार कर रहे हैं । बालकोंको भी वे अपने ही समान आतंकी बनाना चाहते हैं; इसलिए वे चाहते हैं कि बच्चे सेना संचालित विद्यालयके स्थानपर मदरसोंमें जाकर इस्लामिक शिक्षा ग्रहण करें और जिहादकी ओर प्रवृत्त हो; परन्तु भारतीय सेना न केवल आतंकियोंसे रक्षण करती है वरन वहां बालकोंकी शिक्षाका भी ध्यान दे रही है । सेनाका यह साहस प्रशंसनीय है; परन्तु शासकगणोंको भी अब तीव्रता दिखानी चाहिए और कडी कार्यवाहीकर आतंकका अन्त करना चाहिए ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : नभाटा



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