जनवरी १४, २०१९
जम्मू-कश्मीरमें मारे गए आतंकी जीनत-उल-इस्लामके पिताने शवयात्राके समय लोगोंको सम्बोधित किया, जिसका वीडियो प्रसारित हुआ है । इसमें वह कह रहा है कि यह मेरे लिए रोनेकी बात नहीं है, यह गर्वकी बात है । वह जिस उद्देश्यसे निकला था, वह हम प्राप्त करके रहेंगे ।
उसने कहा कि अक्तूबर २००५ में जीनत घरसे बाहर निकला था । इसके पश्चात लगभग ढाई वर्षोंतक कश्मीरसे बाहर ही रहा । कश्मीरसे बाहरका अर्थ है, लोलाब गया था । शोपियांसे लगभग १५० किलोमीटर दूर लोलाब है; परन्तु वह कैसे रहा तथा किस वजह से रहा ?, इसका मुझे ज्ञान नहीं ।
ढाई वर्षों पश्चात उसके साथ रहनेवाला आदमी (गाइड) घर आया और उसका भ्रमणभाष क्रमांक दिया । उस समयमें भ्रमणभाष उतना अधिक नहीं था । इस कारणसे किसीसे भ्रमणभाष लेकर बात करता था । ‘कॉल ट्रैप’ होनेके पश्चात भी उन्हें ऐसा कुछ नहीं मिला, जिससे मुझे कोई हानि होती । एक समय सिडको शिविरमें सैन्य अधिकारी मेरे सामने था, तदोपरान्त भी मैंने उससे बात की ।
“इस्लामिक तुष्टिकरणमें व्यस्त नेताओं व धर्मनिरपेक्ष लोगोंको क्या अब समझमें आ रहा है कि युवा आतंकी क्यों बनते हैं ? वस्तुतः बीज अनुरूप ही संरचना होती है । धर्मान्धोंको मदरसोंसे, तदोपरान्त उनके घरोंसे इस्लाम अनुरूप यही सीखनेको मिलता है तो उससे उस सोचसे हटकर वर्तनकी अपेक्षा कैसे की जा सकती है ? प्रशासन त्वरित आतंकीके पिताको बन्दी बनाकर योग्य दण्ड प्रदान करें, यही राष्ट्रहितमें है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : अमर उजाला
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