बच्चीसे मौलवीने किया दुष्कर्म : मस्जिदको ‘धार्मिक स्थल’ बता रहा ‘मीडिया’, ‘मौलाना’को ‘साधु-तान्त्रिक’ लिख करते हैं खेल
०४ जून, २०२१
उत्तर-पूर्वी देहलीके हर्ष विहारमें एक मस्जिदमें पानी लेने गई १२ वर्षकी बालिकासे मौलवी इलियासने दुष्कर्म किया । मूल रूपसे राजस्थानके भरतपुरका रहनेवाला मौलवी देहली पुलिसद्वारा गाजियाबादके लोनीसे दबोचा गया । ४८ वर्षीय आरोपित मौलवी १४ दिवसकी न्यायिक अभिरक्षामें (हिरासत) है । आक्रोशित लोगोंने मस्जिदके बाहर विरोध प्रदर्शन किया, जिसके पश्चात वहां पुलिसको नियुक्त किया गया ।
मन्दिरोंमें एक थप्पडकी घटनाको भी उछालनेवाला ‘मीडिया’ अब मस्जिदमें दुष्कर्मके प्रकरणको चतुराईपूर्वक लिखकर छुपानेमें लगा है । ‘दैनिक जागरण’ने अपने शीर्षकमें मस्जिदको ‘धार्मिक स्थल’ लिखा । इतना ही नहीं, समूचे लेखमें ४ बार मस्जिदके स्थानपर ‘धार्मिक स्थल’ लिखा गया । ‘दैनिक भास्कर’ने लिखा, “धार्मिक स्थलपर हुई ‘वारदात’ ।” ‘अमर उजाला’ने ‘धार्मिक स्थलमें किशोरीके साथ ‘हैवानियत’ नामसे शीर्षक चलाया । यहां ध्यान देनेवाली बात यह भी है कि १२ वर्षकी बच्चीको ‘अवयस्क’के स्थानपर ‘किशोरी’ भी लिखा गया । ये सब करके मीडिया किसके अपराधोंपर आवरण डालना चाहता है ?
जब छोटेसे छोटे प्रकरणोंमें भी मन्दिरका अभिज्ञान गुप्त नहीं रखा जाता है तो मस्जिदका अभिज्ञान गुप्त रखनेका क्या उद्देश्य है ? जहां दुष्कर्मकी घटना हुई, वह स्थान बच्चियोंके लिए असुरक्षित है, क्या यह लोगोंको नहीं पता चलना चाहिए ? वास्तविक समस्या यह है कि इससे हिन्दू अपमानित होते हैं । ऐसे समाचारोंको प्रथम दृष्टिमें देखकर ऐसा प्रतीत होता है जैसे किसी मन्दिरमें प्रकरण घटित हुए हो, अथवा किसी हिन्दू साधुने इस प्रकारकी घटना की हो । मौलानाओंको ‘तान्त्रिक’ और ‘बाबा’से सम्बोधित करना तो कुछ ‘मीडिया दलों’द्वारा सामान्य प्रचलन बन ही चुका है, आश्चर्य नहीं जब यह ‘मीडिया’ अब मौलानाओंको भी ‘साधु-सन्त’ कह कर ऐसे प्रकरणोंमें उन्हें बचाने लगे ।
यह तो सर्वविदित है कि स्वतन्त्रता पश्चात पत्रकारिता क्षेत्रमें भी हिन्दी भाषाका व्यापक रूपसे उर्दूकरण हो चुका है, ऐसेमें पुनः-पुनः छल और चतुराईसे शब्द चयनके माध्यमसे जिहादियोंके अपराधोंको ढककर उनके अपराधोंको हिन्दू समाजपर मढने और जनमानसमें हिन्दू समाजके प्रति घृणित अवधारणा बनानेका मानसिक षड्यन्त्र अनेक ‘मीडिया दल’ कर रहे हैं । अतः निधर्मी लोकतान्त्रिक व्यवस्थामें ‘मीडिया’ जगतकी पत्रकारिता पक्षपात, अपारदर्शिता, अविश्वसनीयता, अनुत्तरदायी रूपी संङ्क्रमक रोगसे व्यापक रूपसे ग्रसित हो चुकी है । ऐसी पत्रकारिता लोकहितमें कदापि नहीं हो सकती । केवल हिन्दू राष्ट्रकी स्थापनासे ही पत्रकारिता क्षेत्रका उत्तम आदर्शोंसे जीर्णोंद्धार किया जाएगा । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
स्रोत : ऑप इंडिया
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