मोदी शासनने की सवर्ण हिन्दुओंको १०% आरक्षण देनेकी तैयारी, मुसलमान भी होंगें इसमें सम्मिलित !!


जनवरी ७, २०१९


मोदी शासनने सामान्य वर्गमें आनेवाले आर्थिक रूपसे निर्बल लोगोंको नौकरी और शिक्षामें १० प्रतिशत आरक्षण देनेका निर्णय लिया है । केन्द्रीय मन्त्रिमण्डलके इस निर्णयमें धर्मकी बाधा नहीं रखी गई है अर्थात सामान्य श्रेणीमें आनेवाले देशके प्रत्येक निर्धन नागरिकको इस व्यवस्थाका लाभ मिलेगा, उसमें हिन्दूसे लेकर मुस्लिम और दूसरे धार्मिक अल्पसंख्यक भी सम्मिलित हैं ।

सूत्रोंके अनुसार, मन्त्रिमण्डलमें सोमवारको जो निर्णय लिया गया है, उसमें आरक्षणकी वर्तमान व्यवस्थाका लाभ पानेवाले किसी भी जाति-वर्गको इसका लाभ नहीं मिलेगा अर्थात ‘ओबीसी या एससी-एसटी आरक्षण’का जो लोग लाभ उठा रहे हैं, वे नूतन व्यवस्थामें सम्मिलित नहीं किए जाएंगें । सूत्रोंके अनुसार, शासनने अपने निर्णयको धर्मसे परे रखते हुए प्रत्यैक सम्प्रदायके सामान्य श्रेणीवाले निर्धनको इस आरक्षणका लाभ पहुंचानेका निर्णय लिया हैक्ष।

किन लोगोंको मिलेगा लाभ

– यदि कोई मुस्लिम सामान्य श्रेणीमें आता है और वह आर्थिक रूपसे दुर्बल है तो उसे इसका लाभ मिलेगा ।
– इनके अतिरिक्त दूसरे धार्मिक अल्पसंख्यकोंके सामान्य श्रेणीवाले निर्धनोंको भी आरक्षण दिया जाएगा ।
– जिनकी वार्षिक आय ८ लाखसे अल्प हो
– जिनके पास ५ हेक्टेयरसे अल्प कृषिभूमि हो
– जिनके पास १००० वर्ग फीटसे अल्प घर हो
– जिनके पास निगमकी १०९ गजसे अल्प अधिसूचित भूमि हो
– जिनके पास २०९ गजसे अल्पकी निगमकी गैर-अधिसूचित भूमि हो
– जो अभी तक किसी भी प्रकारके आरक्षणके अंतर्गत नहीं आते थे

उल्लेखनीय है कि वर्तमान आरक्षण व्यवस्थाके अन्तर्गत अनुसूचित जातिको १५ प्रतिशत, अनुसूचित जनजातिको ७.५ और अन्य पिछड़ा वर्गको २७ प्रतिशत आरक्षण दिया जाता है अर्थात कुल ४९.५ प्रतिशत आरक्षणकी व्यवस्था अभी पारित है ।

 

“क्या सामान्यवर्गने आराक्षणकी मांग की है ? १०० मेंसे लगभग ६०% आरक्षित कर दिया है, यह शासकवर्गोंद्वारा देशको विनाशकी ओर ले जानेकी पूर्वसिद्धता मात्र है ! राजनीतिक लाभके लिए नेतागण आरक्षणको बढावा दे रहे हैं, जिसके फलस्वरुप न केवल अप्रतिभाशाली आगे आ रहे हैं वरन देश जाति-उपजातियोंमें विभाजित हो चुका है और आरक्षणसे निकला बालक कदापि प्रगतिकर राष्ट्रको नूतन दिशा नहीं दिखा सकता है; क्योंकि वह स्वयं आश्रित व दिशाहीन है ! क्या गणितको महान ऊंचाइयों तक लेकर जानेवाले पण्डित रामानुजने किसीसे भिक्षाकी अपेक्षा की थी ? स्मरण रहे कि एकबार भिक्षा लेनेका संस्कार आ जाए तो वह बालक कभी नेतृत्व शक्तियुक्त शासक नहीं बन सकता और हिन्दुस्तानकी दुर्गतिका एकमात्र यही कारण है; अतः शासनने पूर्णनिष्ठाके साथ राजाका कर्तव्य निभाते हुए आरक्षण पूर्णतया समाप्त करना चाहिए । ”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत: आज तक



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