मोदी बोले- जातिवादी आरक्षण व्यवस्था रहेगी जारी, इसमें कोई शंका नहीं !


अगस्त १३, २०१८

प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीने स्पष्ट किया है कि उनके शासनका जातिवादी आरक्षणपर प्रतिबन्ध लगानेकी कोई इच्छा नहीं है । मोदीने कहा कि देशसे आरक्षण व्यवस्था समाप्त नहीं हो सकती; क्योंकि हमारे संविधानका उद्देश्य और डॉक्टर भीमराव अम्बेडकरके सपने अभी तक अधूरे हैं । प्रधानमन्त्रीने उन अफवाहोंको नकार दिया, जिसमें कहा जा रहा है कि उनका शासन देशसे जातिवादी आरक्षणको समाप्त करना चाहता है । प्रधानमन्त्रीने स्पष्ट शब्दोंमें कहा कि आरक्षण व्यवस्था बनी रहेगी और इसमें किसीको कोई शक नहीं होना चाहिए ।

प्रधानमन्त्री मोदीने ये बातें समाचार विभाग ‘एएनआई’से वार्ताके समय कहीं । मोदीने कहा कि यह हमारा दायित्व है कि हम सभी अम्बेडकरके स्वप्नको पूरा करें और आरक्षण उन स्वप्नको पूरा करनेका एक महत्वपूर्ण कारक है । अपने शासनकी प्राथमिकताओंके बारे में बात करते हुए मोदीने कहा कि उनका उद्देश्य सभी वर्गोंका समग्र विकास है । बाबासाहेबका स्वप्न था कि देश सशक्त हो और हम उनके स्लप्नको पूर्ण करनेके लिए पूर्ण रूपसे प्रतिबद्ध हैं । हमारा उद्घोष है, ‘सबका साथ, सबका विकास’, जिसे पूर्ण करनेके लिए यह बात सबसे महत्वपूर्ण है कि गरीबों, शोषित और पिछडों, दलित और आदिवासियोंके अधिकारोंकी रक्षा की जाए ।

विपक्षपर लक्ष्य साधते हुए प्रधानमन्त्रीने कहा कि कुछ समूह इस प्रकारकी बातें फैला रहे हैं कि भाजपा आरक्षण समाप्त करना चाहती है और प्रसार तन्त्रके कुछ वर्ग इस प्रकारकी बातें फैलानेमें सहायता कर रहे हैं । प्रधानमन्त्रीने कहा कि जो लोग निरन्तर इस प्रकारकी बातें फैला रहे हैं और इस प्रकरणका राजनीतिकरण करनेका प्रयास कर रहे हैं, ये वही लोग हैं, जिन्होंने हमेशा बाबासाहेबके स्वप्नको दबानेका प्रयास किया । विपक्षपर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि समाजके दुर्बल वर्गोंके मध्य अविश्वास और सन्देह पैदा करनेका प्रयास किया जा रहा है; लेकिन भारतके लोग समझदार हैं और वो इस षडयन्त्रपर विश्वास नहीं करेंगे । कांग्रेसपर और विशेषतया पूर्व प्रधानमन्त्री राजीव गांधीपर आक्रामक होते हुए मोदीने कहा, ‘मैं सभी लोगोंसे विनती करता हूं कि लोग देखें कि किस तरप्रकारह पूर्व प्रधानमन्त्री राजीव गांधीने ‘मण्डल कमीशन’का विरोध किया था । संसदके पटलपर उन्होंने इसका पुरजोर विरोध किया था । आज भी उनकू दलकी स्थिति बदली नहीं हैं ।’

स्रोत : जनसत्ता



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