मध्यप्रदेशकी महिला एवं बाल विकास मन्त्री नहीं पढ पाई भाषण, कहा ‘कलैक्टर पढेंगें’ !


जनवरी २६, २०१९


मध्यप्रदेशकी महिला एवं बाल विकास मन्त्री इमरती देवी आज ग्वालियरमें गणतन्त्र दिवसके अवसरपर आयोजित समारोहमें मुख्यमन्त्रीके संदेशका वाचन भी नहीं कर पाईं और उनका इस दायित्वका जिलाधिकारीने (कलेक्टरने) वहन किया ।

ग्वालियर संभाग मुख्यालयपर आयोजित गरिमामय समारोहमें उस समय अप्रिय स्थिति बन गई, जब महिला मन्त्री इमरती देवीने मुख्यमन्त्रीके संदेशका वाचन प्रारम्भ किया । वे अटक-अटक कर एक पंक्ति भी नहीं पढ पाईं ! अन्ततः निकट खडे अधिकारीके संकेतपर मन्त्रीने कहा कि ‘अब कलेक्टर पढेंगे’ । इतना कहते ही जिलाधिकारीने संदेशका वाचन आरम्भ किया और वहां उपस्थित लोग अपनी हंसी नहीं रोक पाए ।

श्रीमती इमरती देवीने मन्त्रीके रूपमें २५ दिसम्बरको शपथ ग्रहण की थी । इसके पश्चात उन्हें महिला एवं बाल विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागका दायित्व भी सौंपा गया । वे ग्वालियर जनपदके डबरासे कांग्रेसके टिकटपर विधायक चुनी गई हैं । उन्होंने उच्च विद्यालयतक शिक्षा प्राप्त की है ।

इस सम्पूर्ण घटनाक्रमका वीडियो सामाजिक प्रसार माध्यमपर प्र,आरित हो रहा है । प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष विजेश लूनावतने वीडियो ‘ट्वीट’ करते हुए लिखा है कि ‘ग्वालियरमें गणतन्त्र दिवस पदयात्रामें (परेडमें) मन्त्री श्रीमती इमरती देवीका भाषण प्रभावी और जोशीला रहा । अवश्य सुनिए !’

इसीप्रकार सागर संभाग मुख्यालयपर गणतन्त्र दिवसके मुख्य समारोहमें राजस्व एवं परिवहन मन्त्री गोविन्द सिंह राजपूत ध्वजारोहणके पश्चात राष्ट्रगानके समय तत्काल सलामीकी मुद्रामें नहीं आ पाए । वे राष्ट्रगानके समय सीधे खडे हुए थे, तभी जिलाधिकारीने (कलेक्टरने) उन्हें सलामीकी मुद्रामें आनेका संकेत किया । इसके पश्चात मन्त्री सलामीकी मुद्रामें आए और अपना दाया हाथ माथेपर ले जाकर सलामी दी । यह वीडियो भी सामाजिक प्रसार माध्यमोंपर तीव्रतासे प्रसारित हो रहा है ।


“निस्सन्देह कार्य करनेके लिए भाषण की और भाषणके लिए पढे-लिखे होनेकी आवश्यकता नहीं है । उसके लिए धर्माभिमान, राष्ट्राभिमान, नेतृत्त्व शक्ति व जनभावनाका होना आवश्यक है । यदि मन्त्रीमें राष्ट्राभिमान होता तो सामान्य बोलचालकी भाषामें भी गणतन्त्रकी व्याख्या की जा सकती थी ! आज मुख्यतः दो ही प्रकारके नेतृत्त्त शेष हैं एक जिन नेताओंमें शिक्षा है, उनमें राष्ट्राभिमान नहीं है, दूसरे अन्योंमें दोनों ही नहीं है तो देश आगे बढे तो कैसे ? अब इस स्थितिको परिवर्तित करना अत्यावश्यक है”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : लाइव हिन्दुस्तान



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