आजकल अंग्रेजीका एक शब्द आधुनिक बने हिन्दुओंमें भी प्रचलित हो गया है और वह है “मुझे स्पेस चाहिए !” वस्तुत: इसका अर्थ है मेरे अहंकारको मत छेडो ! मैं जैसा हूं/जैसी हूं, वैसा ही रहने दो ! अब तो यह पति-पत्नी, भाई-बहनमें भी प्रचलित हो गया है । महानगरोंमें ‘स्पेस’का यह महारोग, महामारीके रूपमें फैल रहा है । यदि यह महारोग सर्वत्र फैल गया तो भारतकी स्थिति भी विदेशों समान हो जाएगी, जहां इस ‘स्पेस’के कारण लोगोंके मरनेके पश्चात उनके पडोसीको शवकी दुर्गन्धसे उनकी मृत्युके विषयमें पता चलता है ! इसलिए समाजको दोष व अहंनिर्मूलनकी प्रक्रिया बाल्यकालसे ही सिखाई जानी चाहिए और यह हिन्दू राष्ट्रमें अवश्य होगा ।
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