मार्च १५, २०१९
मुम्बईके ‘सीएसटी’ रेलवे स्थानकके (स्टेशनके) पास गुरुवार, १४ मार्चकी सन्ध्या एक ‘फुटओवर’ पुल गिर गया । इस दुर्घटनामें ६ लोगोंकी मृत्यु हो गई, जिसमें ३ महिलाएं सम्मिलित हैं । वहीं, ३३ लोग चोटिल भी हुए हैं, जिन्हें चिकित्सालय पहुंचाया गया है ।
शुक्रवार, १५ मार्चको मुख्यमन्त्री फडणवीस घटनास्थलपर पहुंचे, इस मध्य इसका जांच ब्यौरा भी सामने आया है, जिसमें ‘बीएमसी’की अनदेखी ज्ञात हुई है । आरम्भिक ब्यौरेकी मानें तो इस पुलकी जांच कुछ ही समय पूर्व हुई थी, जब अंधेरीमें एक पुलका भाग गिरा था । ये पुल १९८१ में बना था और तभीसे ‘बीएमसी’के अधीन था ।
ब्यौरेके अनुसार, जांचके पश्चात बीएमसीको कुछ सुधार करनेको कहा गया था; परन्तु उसे ठीक नहीं किया गया था । यदि सुधार नहीं हुआ था तो पुलको रोक सकते थे । बताया ये भी जा रहा है कि पुलके ‘गार्डर’पर जंग लगा हुआ था, इसी कारणसे पुल नीचे गिरा !
इस दुर्घटनाके पश्चात महाराष्ट्र शासनने उच्च स्तरीय जांचकी मांग की है । प्रकरणमें आजाद मैदान पुलिस स्टेशनमें ‘आईपीसी- धारा ३०४ ए’के (अनदेखीसे मृत्यु) तहत मध्य रेलवे और बीएमसीके सम्बन्धित अधिकारियोंके विरुद्घ प्राथमिकी प्रविष्ट की गई है ।
जानकारीके अनुसार मुम्बईके सीएसटी रेलवे स्थानकपर गुरुवार सन्ध्या जब लोग अपने घरकी ओर लौट रहे थे, तभी स्टेशनसे बाहरका फुटओवर पुलका एक भाग गिर पडा । दुर्घटनामें दो महिलाओं, अपूर्वा प्रभु और रंजना तांबे सहित छह लोगोंकी मृत्यु हो गई, जबकि ३२ लोग गम्भीर रूपसे चोटिल हो गए । लोगोंकी चीख-पुकार सुन लोगोंने तुरन्त बचाव कार्य आरम्भ कर दिया ।
बीएमसी आपदा प्रबन्धनने आपातकालीन सहायक चलभाष क्रमांक जारी किया है । पीडित परिवार १९१६, ९८३३८०६४०९, ०२२-२२६२१८५५, ०२२-२२६२१९५५ पर दुर्घटनासे जुडी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं । इसके साथ ही मुख्यमन्त्रीने मृतकोंके परिजनोंके लिए ५ लाख और चोटिलोंको ५० सहस्र रुपये सहायता राशि देनेकी घोषणा की ।
बताया जा रहा है कि यह पुल ३० वर्षसे भी अधिक प्राचीन है । घटनाके पश्चात महाराष्ट्रके मुख्यमन्त्री देवेन्द्र फडणवीस घटनास्थलपर पहुंचे और दुर्घटनाकी उच्चस्तरीय जांचके आदेश दिए ।
“भारतमें प्रायः ऐसा देखा जाता है कि शासक गणों व कर्मियोंके कारण अनेकानेक लोगोंको अपने प्राण खोने पडते हैं और हमारे नेतागण उसपर सहायक राशिकी छाप लगाकर निकल लेते हैं । क्यों नहीं बीएमसी व उनके उच्च अधिकारियोंपर हत्याका प्रत्यक्ष दोषारोपण लगाना चाहिए व उस मन्त्रीपर भी क्यों नहीं, जिसके अधीन ‘बीएमसी’ कार्यरत है । कैसे नेतागण अपने उत्तरदायित्वसे बचकर निकल सकते हैं, इसका उत्तरदायित्व निर्धारित होना चाहिए और यह सब न होना ही इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है कि अराजकता व भ्रष्टाचार भारतकी एक-एक कणमें व्याप्त हो चुका है । इस लोकतन्त्र व इसके संरक्षकोंने तो अपनी बुद्धिसे उपाय करके देखे हैं; परन्तु सभी आधारहीन व निष्फल ही निकले हैं; अतः अब धर्मराज्यकी स्थापनाकर ही इस समस्याका मूल सहित निवारण किया जा सकता है !”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : न्यूज १८
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