मुम्बई उच्च न्यायालयने जुमा मस्जिदमें केवल ५० लोगोंको नमाज पढनेके लिए दी अनुमति


१६ अप्रैल, २०२१
        मुम्बईकी जुमा मस्जिदमें सात सहस्र लोगोंके लिए एक साथ नमाज पढनेका स्थान है । ‘कोरोना’ महामारीके कारण, मुम्बई उच्च न्यायालयने वहां एकत्रित होनेपर प्रतिबन्ध लगाया है । उच्च न्यायालयके अनुसार धार्मिक प्रथाओंको मनानेका अधिकार सभीको है; किन्तु देशवासियोंको ‘कोरोना’ महामारीसे सुरक्षित रखना बहुत ही आवश्यक है । एक एकडमें फैली हुई मस्जिदमें लगभग पचास लोगोंको ही एकत्रित होकर नमाज पढने हेतु अनुमति दी गई, जबकि यहां सात सहस्र लोगोंके लिए स्थान है । याचिककर्ताने देहलीमें एकत्रित होकर नमाज पढनेकी अनुमतिके समान आज्ञा मांगी, जिसे उच्च न्यायालयने निरस्त कर दिया । शासकीय अभिवक्ता ज्योति चव्हाणने ऐसी अनुमतिका विरोध किया और कहा कि ‘कोविड’की बढती महामारीको देखते हुए यह अनुमति नहीं दी जा सकती । अभिवक्ता ज्योतिने कहा कि ऐसे धार्मिक कृत्य अपने-अपने निवासपर भी किए जा सकते हैं; क्योंकि राज्य शासन इस समय ‘ऑक्सीजन’की न्यूनतासे जूझ रहा है; इसलिए देहलीके सम्मान ‘कोरोना’में एकत्रित होनेकी होनेकी अनुमतिको यहां मुम्बईमें नहीं माना जा सकता । परिस्थितियोंको देखते हुए महाराष्ट्र शासनने कडे ढंगसे पूर्णतः गृहबन्दीकी घोषणा की है ।
     जिस प्रकारकी गृहबन्दीके लिए अब प्रयास किए जा रहे हैं, यदि यह गृहबन्दी समय रहते प्रारम्भमें ही ये कठोरतासे लगाई जाती, तो आज इस प्रकारके सङ्कटसे सभी सुरक्षित रह पाते और देशकी स्थिति अनियन्त्रित न होती । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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