जिहादी इकबाल शेखने की सास श्याम शिगमके साथ नृशंसता, पत्नी लीनाको खोजने गया था ससुराल


१३ सितम्बर, २०२१
       महाराष्ट्रके मुंबईके विले पार्लेमें गत दिवस पूर्व एक ‘हिस्ट्रीशीटर’ दामादने अपनी सासको निर्दयतासे मृत्युके कर दी । घटना इतनी नृशंसताके साथ घटित की गई, जिससे शरीरका भीतरका भाग भी बाहर निकल आया । प्रतिवेदनके (रिपोर्टके) अनुसार, प्रथम महिलापर ‘टाइलों’से आक्रमण किया गया, उसके पश्चात ‘चाकू’से आक्रमण हुआ तथा अन्तमें उसके गुप्ताङ्गोंमें बांस घुसा दिया गया । इस समूची घटनामें प्राय: एक सप्ताह पूर्व, ‘पुलिस’ ‘आईपीसी’की धारा-३७७ एवं ३०२ के अन्तर्गत अभियोग (मुकदमा) प्रविष्ट कर चुकी है तथा आरोपित पकडा जा चुका है ।
      ‘मीडिया’ प्रतिवेदनके अनुसार, आरोपितका अभिज्ञान (पहचान) ४२ वर्षीय इकबाल अब्बास शेखके रूपमें हुआ है । उसपर समूची मुंबईमें २८ अभियोग प्रविष्ट हैं । ‘चेन स्नैचिंग’ जैसी घटनामें इकबाल पुणे यरवदा कारागृहमें ३ वर्ष बन्द था । १ सितम्बरको जब वह मुक्त (रिहा) हुआ, तो वह अपनी ६१ वर्षीय सास शमाल श्याम शिगमके घर गया; जिससे वह अपनी पत्नी लीना एवं दो बच्चोंसे मिल सके । शेखने अपनी साससे पूछा तो उन्होंने कोई जानकारी नहीं दी । इससे शेख क्रोधित हो गया एवं अपनी ही सासको पीटने लगा ।
      शेखने प्रथम अपनी सासका मस्तक कुचला, पश्चात ‘चाकू’से मारा तथा उसके गुप्ताङ्गोंमें बांस डालकर भीतरके अङ्ग बाहर निकाल दिए । इसके पश्चात, वह घटनास्थलसे भाग गया; यद्यपि घटनाके एक दिवस पश्चात उसे बन्दी बना लिया गया ।
       यह है जिहादियोंकी वास्तविकता ! ये न तो सम्बन्धोंको मान देते है एवं न ही इनका कोई सम्बन्धी होता है । जिहादी, निशाचरोंका ही दूसरा रूप होते है । इनको बन्दी नहीं बनाया जाना चाहिए; अपितु इनके कुकर्मोंके लिए मृत्युदण्ड दिया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ
 
 
स्रोत : ऑप इंडिया


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