ऐसे अपराधियोंको प्रतिभूतिपर मुक्त करना अनुचित, मुनव्वर फारूखीपर बोले न्यायाधीश रोहित आर्य 


२६ जनवरी, २०२१
          मध्य प्रदेशके उच्च न्यायालयके न्यायमूर्ति रोहित आर्यने ‘कॉमेडियन’ मुनव्वर फारूखीकी प्रतिभूति याचिकापर २५ जनवरीको आदेश सुरक्षित रख लिया है । उन्हें २ जनवरी २०२१ को हिन्दू देवी-देवताओंपर अभद्र टिप्पणी करनेके आरोपमें बन्दी बनाया गया था । एक अधिवक्ताने कहा कि आरोपी मुनव्वर फारूखीने १८ माह पूर्व सामाजिक जालस्थानोंपर अपने ‘कॉमेडी शो’में तीन भिन्न-भिन्न समयपर हिन्दू देवी-देवताओंपर अभद्र टिप्पणी की थी । उनके देखा देखी अन्य ‘कॉमेडियन’भी ऐसा करनेको उद्यत हो रहे हैं । उनके संग बन्दी बनाए गए सहकलाकार नलिन यादवकी प्रतिभूति याचिकापर भी कोई निर्णय नहीं लिया गया है ।
     उल्लेखनीय है कि १ जनवरी २०२१ को इंदौरके ५६ दुकान क्षेत्रमें आयोजित एक कार्यक्रममें केन्द्रीय गृहमन्त्री अमित शाह तथा हिन्दू देवी-देवताओंपर अभद्र टिप्पणी करनेके आरोपमें गुजरात निवासी मोहम्मद फारूखीको २ जनवरीको धारा २९९ अ और धारा २६९ के अन्तर्गत बन्दी बनाया गया था । स्थानीय भाजपा  विधायक मालिनी गौड और प्रसिद्ध भाजपा नेता स्व. लक्ष्मण सिंह गौडके पुत्र एकलव्य सिंहने मुनव्वरके विरुद्ध परिवाद प्रविष्ट किया था ।
        न्यायमूर्तिने इसे गम्भीर अपराध मानकर इसपर न्याय सुरक्षित रख लिया है; परन्तु उदारवादी, सामाजिक जालस्थानोंपर न्यायाधीशके पूर्वके कुछ न्याय ही अतर्कसंगत बता रहे हैं । पूर्वमें कभी न्यायमूर्तिने किसी छेडछाडके आरोपीको पीडिता लडकीसे राखी बंधवाकर उसकी रक्षाका वचन देनेका आदेश दिया था ।
        उदारवादी मानसिकताके चलते ही अन्य धर्मी लोग हमारे देवी-देवताओंका अपमान करनेका दुःसाहस करते हैं । न्यायमूर्तिके न्यायके प्रति आदर होना चाहिए । हंसने, हंसानेके लिए विषय अनेक हो सकते हैं; किन्तु देवी-देवताओंका सम्मान होना चाहिए और कमसे कम भारतमें रहना है तो यह अवश्य ही होना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ 

स्रोत : ऑप इंडिया



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