मुनव्वर फारूकीके लिए ‘मीडिया’ने खेला ‘विक्टिम कार्ड’, कारावासमें बन्द अन्य ४ के लिए क्यों मर गई संवदेनाएं ?


१० फरवरी, २०२१
     मुनव्वर फारूकीको ‘जमानत’ मिली । वो कारावाससे छूटकर स्वतन्त्र घूम रहा है । ‘टाइम्स ऑफ इंडिया’की ‘रिपोर्ट’के अनुसार उसके साथ पकडे गए ४ लोग अब भी इन्दौर कारावासमें हैं । दोनों छात्र हैं ।
     परिवारने ‘मीडिया’को बताया कि उन्हें ज्ञात था कि दोनों भाई मुनरो कैफेमें १ जनवरीको कार्यक्रमके लिए गए हैं; किन्तु उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि वहांपर हिन्दू देवी-देवताओंका अपमान किया जाएगा । परिवारका कहना है कि उनके पुत्रने दो वर्ष पूर्व ‘कॉमेडी’  प्रारम्भ की थी और उसे फारूकीके विषयमें पता भी नहीं था । उसकी भेंट केवल गन्तव्यपर ही हुई थी ।
       सबको ज्ञात है कि मुनव्वर फारूकीपर पुलिस कार्यवाही १ जनवरी २०२१ को हुई थी और वह हिन्दू देवी-देवताओंका अपमान पहले भी करता रहा है; अतः सिद्ध होता है कि परिवार असत्य कह रहा है । इसलिए मध्यप्रदेश शासनको मुनव्वर फारूकीकी प्रतिभूति निरस्त करवानेके प्रयास करने चाहिए और उसका साथ देनेवाले हिन्दुओंको भी दण्डित किया जाना चाहिए । – सम्पादक, वैदिक उपाासना पीठ 

स्रोत : ऑप इंडिया



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