शोधमें दावा, मुस्लिम बस्तियोंको ‘मिनी पाकिस्‍तान’ समझते हैं पुलिसवाले


दिसम्बर ८, २०१८

भारतीय राज्योंमें मुस्लिम समुदाय और पुलिसके मध्य होने वाली वार्तामें विभिन्न स्तरोंपर अल्पसंख्यक समुदायके विरुद्ध पूर्वाग्रह साधारण बात है । इसके अतिरिक्त धार्मिक विचारों और प्रतीकोंद्वारा बहुसंख्यक समुदायकी वीरताकी बात करना भी पुलिसद्वारा साधारण बात है । पूर्व मुख्य सूचना आयुक्त वजाहत हबीबुल्ला और क्विलके नेतृत्व वाले कॉमनहेल्थ ह्यूमन राइट्स इनिशिएटीवने (सीएचआरआई) ५० पृष्ठके विवरणमें इस बातका दावा किया गया है । विवरणमें यह भी कहा गया है कि पुलिस मुस्लिम बहुलता वाले क्षेत्रोंको लघु पाकिस्तान समझती है !

दिल्ली, अहमदाबाद, रांची, लखनऊ, बेंगलुरु, गुवाहाटी, कोझीकोड और मुम्बईमें १९७ लोगोंसे वार्ताके आधारपर यह विवरण तैयार किया गया है । इसमें अधिकतर मुस्लिम पुरुषों और महिलाओंसे वार्ता की गई । इसके अतिरिक्त सीएचआरआईने १५६ सेवानिवृत्त मुस्लिम पुरुष पुलिसकर्मियोंके साथ साक्षात्कार भी किया । विवरणमें कहा गया कि पुलिस मुस्लिमोंको उनकी पहचानके आधारपर लक्ष्य बनाती है । मुस्लिम महिलाओंको भी परेशानीका सामना करना पडता है । पुलिस महिलाओंको जब बुर्का या हिजाब पहने देखती है, तब उनका रवैया तुरन्त परिवर्तित हो जाता है ।

अहमदाबादकी एक मुस्लिम महिलाने सीएचआरआईको बताया, ‘पुलिस हमारा अपमान करती है, जब उन्हें ज्ञात हो जाए कि हम मुस्लिम बहुलता वाले क्षेत्रसे आए हैं । एक बार तो हमसे कहा गया, ‘बुर्का निकालो, क्या बम लेकर आए हो क्या ?’ विवरणके एक अन्य भागके अनुसार मुस्लिम अपनेको अलग-थलग अनुभव कर रहे हैं । वो स्वयंको असुरक्षित अनुभव कर रहे हैं । ऐसा इसलिए है, क्योंकि जब वो पुलिस स्टेशन जाते हैं, तब वहां हिंदू धर्म वाले चित्र दिखते हैं । पुलिस स्टेशनके भीतर ही पूजा होती है । एक महिलाने बताया कि मुम्बई पुलिसकर्मियोंद्वारा तिलक लगाना उन्हें डराता है ।

 

“विवरणमें यह भी बताना चाहिए था कि लघु पाकिस्तान समझनेके क्या कारण है ? क्या मुसलमान समुदाय अपने बालकोंको मदरसोंमें भेजना बन्द करेंगें जहां उन्हें केवल आतंककी शिक्षा दी जाती है ? क्या मुसलमान हिन्दुओंकी अधिकार की गई भूमि छोडनेको सिद्ध है ? क्यों मुसलमान युवा ही आइएसआइमें सम्मिलित होकर राष्ट्र विरोधी कृत्य करते हैं ? क्यों गायोंको जो अन्योंके लिए पूजनीय है काटा जाता है ? यदि नहीं है तो स्पष्ट है कि इसका कारण केवल धर्मान्धता है और इसको विश्वका प्रत्येक देश समझ रहा है ।”- सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 

स्रोत : जनसत्ता



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