गैरमुस्लिम व्यक्तिके साथ प्रेम करनेपर इरफान और रिजवानने बहनको एसिड फेंककर जलाया !!


मई १५, २०१९



देहलीमें एक युवर्तीके साथ उसके परिवारवालोंद्वारा ही अमानवीय कृत्य करनेका प्रकरण सामने आया है । दादरी कोतवाली क्षेत्रके कोट नहरके पास गुरुवार, ९ मईको तेजाबसे झुलसी मिली युवतीका नाम सलमा है, जिसे सफदरगंज चिकित्सालयमें चिकित्साके लिए प्रविष्ट कराया गया था । उसकी स्थिति कई दिनोंतक गम्भीर बनी रही । सलमाके भाइयोंके नाम रिजवान और इरफान हैं । समाचारोंके अनुसार, ९ मईको गुलावठीकी रामनगर निवासी सलमाको उसके भाई इरफान और रिजवान नोएडा घुमानेके बहाने लाए थे । इसके पश्चात कोट नहरके सामने भाइयोंने बहनका गला दबाया, चेहरे व शरीरपर एसिड डाला और फिर मृत समझ कर चले गए । अभीतक ये दोनों ही आरोपी पुलिसके नियन्त्रणसे बाहर हैं ।

 

‘टाइम्स ऑफ इंडिया’में प्रकाशित समाचारका चित्र

चिकित्सालय पहुंचानेके पश्चात पुलिसने सलमाके वक्तव्यके आधारपर उसकी अम्मीको खोज लाई । वो सलमाके साथ कुछ समय चिकित्सालयमें रही । अपनी पुत्रीको आश्रय देनेके स्थानपर वो एकाएक छोडकर भाग गई । पुलिसके अनुसार, सलमाके दोनों भाई उसके एक पडोसीके साथ प्रेम सम्बन्ध होनेको लेकर क्रोधित थे । पुलिसने यह भी बताया है कि पडोसी विवाहित है और वो मुस्लिम नहीं है । दोनों भाइयोंके विरुद्घ हत्याके प्रयासका प्रकरण (आईपीसी धारा-३०७) प्रविष्ट की गई है ।

 

सलमाकी स्थिति गत ५ दिवससे गम्भीर बनी हुई है और एसिडके कारण उसके श्वसन प्रणालीकी हानि हुई है । इससे उसकी श्वास लेनेकी क्षमतापर बुरा प्रभाव पडा है । उसे शीघ्र ही जीवन रक्षण पद्धति (वेंटिलेटरपर) रखा जा सकता है ।

 

सलमाके साथ जो भी हुआ और अभी उसकी जो स्थिति है, उसने चिकित्सालयमें नियुक्त पुलिसवालोंको झकझोर कर रख दिया है । अभी वही सब सलमाका परिवार बन गए हैं; परन्तु सलमा है कि बार-बार अपनी मांसे बात करनेकी बात कहती है ।

 

२२ वर्षाया सलमाका मुख झुलस गया है और उसके नेत्र तेजाबके कारण जल गए हैं । वह ठीकसे कुछ देख भी नहीं पा रही है । उसके दोनों भाई घरसे भागे हुए हैं ।

 

“वह कौनसी विषकारी मानसिकता है, जो धर्मान्धोंको मानवतासे दानवताकी ओर ले जाती है कि एक युवतीपर, जो उसकी स्वयंकी बहन है, उसपर भी एसिड डालकर जला दे !! इस्लाम और इसके विषसे भरे लोगोंने विश्वको क्या दिया है ? केवल यह सिखाया है कि महिलाओंका भोग किसप्रकार करना है, कैसे उनपर अत्याचार करना है और किसप्रकार अमानवीयसे अमानवीय कृत्य किया जा सकता है !! इस मानसिकताकी न ही विश्वको आवश्यकता है, न ही पवित्र आर्य भूमि भारतको ! सभीने मिलकर इस मानसिकताका विरोध करना चाहिए ताकि उस मानसिकताका अन्त हो, जो निर्दयतासे मानवताको नष्ट करती है ।” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ

 


स्रोत : ऑप इण्डिया



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