मार्च १, २०१९
उत्तर प्रदेशके मिर्जापुर स्थित चुनारमें एक मस्जिदके इमामने प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदीपर न केवल भद्दी टिप्पणी की, वरन उनके कई चित्रोंको भी आपत्तिजनक रूपसे विकृतकर सामाजिक जालस्थलपर पोस्ट किया । वो स्वयंको ‘इस्लामिक स्कॉलर’ बताता है । लोगोंद्वारा मना किए जाने व विरोध करनेके पश्चात इमामने वो लेख हटानेसे मना कर दिया । बादमें थानेमें परिवाद प्रविष्ट करानेपर पुलिसने उसे बन्दी बना लिया है । इमामका नाम आबिद अली हुसैन है ।
पुलवामा आतंकी आक्रमणके पश्चात भारतद्वारा पाकिस्तानपर किए गए ‘एयर स्ट्राइक’के विरुद्घ इस व्यक्तिने कई आपत्तिजनक चित्र पोस्ट किए थे, जोकि भद्दे और अश्लील होनेके साथ प्रधानमन्त्रीके चरित्रके विरुद्घ थें, जोकि किसी सॉफ्टवेयरकी सहयतासे विकृत किए गए थें । मूल रूपसे बिहारके रहनेवाले इमाम आबिदपर ‘१५३-ए’, ‘२९५-ए’के अन्तरगत प्रकरण प्रविष्ट किया गया है ।
२७ वर्षीय इमाम आबिद लगभग एक दशक पूर्व बिहारसे मिर्जापुर आ गया था । उसे २०१२ में जलालपुर गांव स्थित मस्जिदका इमाम बनाया गया था ।
“ये कैसा संविधान है कि रहना-खाना हिन्दुस्तानमें है और सहानुभूति पाकिस्तानसे है और केवल यहीं महाशय क्यों, लगभग प्रत्येक इमामकी यही स्थिति है कि उनका प्रेम स्वतः ही हरे रंगके लिए उमडता है और यह केवल इसलिए हो रहा है; क्योंकि केसरिया रंगधारी अपने पूर्वजोंकी महानताको विस्मरणकर धर्मनिरपेक्षका चोला ओढे बैठे हैं ! हिन्दुओ ! जो इमिम देशके प्रति अपनी निष्ठा नहीं प्रकट कर पाता है, वह आपके प्रति कितना निष्ठावान होगा, यह स्वयं विचार कर लें ! वैसे तो इमामके इस कृत्यके लिए राष्ट्रद्रोहके आरोपमें मृत्युदंड ही एकमात्र दण्ड हो सकता है; परन्तु हास्यास्पद है कि हमारा लोकतन्त्र इसकी अनुमति नहीं देता है !” – सम्पादक, वैदिक उपासना पीठ
स्रोत : ऑप इण्डिया
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